CG News: नकटी के विस्थापितों ने घेरा मंत्री ओपी चौधरी का बंगला, पुलिस से झड़प, बैनर-पोस्टर फाड़े

Nakti village bulldozer action raipur राजधानी रायपुर से सटे नकटी गांव में बुलडोजर एक्शन को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को नकटी गांव के विस्थापित लोगों ने रायपुर में मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव कर दिया है। इस दौरान ग्रामीण आक्रोशित हो गए। बंगले में प्रवेश करने की कोशिश करने लगे। जिसे लेकर पुलिस के साथ विस्थापितों की जमकर धक्का-मुक्की हुई। गुस्साए ग्रामीणों ने बंगले के बाहर लगे मंत्री के पोस्टर, बैनर फाड़ दिए। लगातार बंगले के अंदर घुसने की कोशिश करते हुए उनकी पुलिस के साथ तीखी नोक-झोंक और झड़प हुई।

पूर्व सांसद की पुलिस जवानों से हुई धक्का-मुक्की

नकटी के विस्थापितों के प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। शाम होते-होते ग्रामीणों का गुस्सा फूट गया। प्रदर्शन में शामिल रायपुर के पूर्व सांसद विकास उपाध्याय की भी पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। पूर्व सांसद को काबू करने के लिए पुलिस जवान जूझते दिखे। पुलिस ने प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के तहत शंकर नगर की ओर जाने वाली सड़क के एक हिस्से को बंद कर दिया है।

नकटी के विस्थापितों ने घेरा मंत्री ओपी का बांग्ला, पुलिस के साथ झुमाझटकी, फाड़े बैनर, पोस्टर

कलेक्ट्रेट के सामने भी धरने पर बैठे ग्रामीण

इससे पहले नकटी गांव के लोग रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे थे। उनके प्रदर्शन में कांग्रेस नेता भी शामिल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी थी कि शुक्रवार तक मांगें पूरी नहीं होने पर वे अनिश्चितकालीन धरना और जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे। नकटी गांव में 80 घरों पर बुलडोजर चलने के तीन दिन बाद भी उनका विरोध जारी है।

पूर्व डिप्टी सीएम पहुंचे थे विस्थापितों से मिलने

गुरुवार को पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव गांव पहुंचे और प्रभावितों से मुलाकात की थी। वहीं भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रात के अंधेरे में घर तोडऩे वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और वे आज भी ग्रामीणों के साथ खड़े हैं।

80 घर तोड़ दिए गए

बता दें कि कार्रवाई से 2 दिन पहले ही ग्रामीण सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पहुंचे थे। सांसद ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि बरसात तक कोई तोडफ़ोड़ नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच 29 जून को 80 घर तोड़ दिए गए।

छोटे मकानों में शिफ्ट किया

बता दें कि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को ईडब्ल्यूएस मकान दिए हैं, लेकिन सभी को आवास नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि मकान छोटे हैं और उनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जिससे परिवारों का रहना मुश्किल हो रहा है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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