Modi Cabinet Decision: सेमीकॉन इंडिया 2.0 और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी, 1.89 लाख करोड़ के पैकेज पर मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को नई गति देने वाले कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये की 7 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें 1,27,500 करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना, 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (एमपीएमएस), यूरिया-2026 कार्यक्रम और वाराणसी में 25,446 करोड़ रुपये से अधिक की दो मेगा एलिवेटेड हाईवे परियोजनाएं शामिल हैं।

सेमीकॉन 2.0 से भारत बनेगा वैश्विक सेमीकंडक्टर हब

केंद्र सरकार ने 1,27,500 करोड़ रुपये की सेमीकॉन 2.0 योजना को मंजूरी देकर भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और अनुसंधान का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस योजना का उद्देश्य देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अग्रणी बनाना और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

छह स्तंभों पर आधारित होगी नई योजना

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 2.0 योजना छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी।

– चिप डिजाइन को बढ़ावा: बौद्धिक संपदा (आईपी), चिप डिजाइन और रणनीतिक व व्यावसायिक उत्पादों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। वर्तमान में देश के 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं।
– सप्लाई चेन का विकास: सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, रसायनों, गैसों और अन्य आवश्यक सामग्रियों के उत्पादन व अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
– नए फैब्रिकेशन प्लांट: सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्क्रीट कंपोनेंट फैब और डिस्प्ले फैब स्थापित करने पर विशेष जोर रहेगा।
– पैकेजिंग और परीक्षण: अत्याधुनिक पैकेजिंग और टेस्टिंग तकनीकों के लिए वैश्विक कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
– अनुसंधान एवं विकास: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नवाचार और शोध को बढ़ावा मिलेगा।
– कुशल मानव संसाधन: उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे।

315 विश्वविद्यालयों में 68 हजार छात्र ले रहे प्रशिक्षण

सरकार के अनुसार, वर्तमान में देश के 315 विश्वविद्यालयों में लगभग 68 हजार विद्यार्थी आधुनिक चिप डिजाइन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नई योजना से इस क्षेत्र में कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

62,500 करोड़ की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना को भी मंजूरी

कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (एमपीएमएस) के लिए 62,500 करोड़ रुपये के प्रावधान को भी मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य घरेलू मोबाइल उत्पादन को बढ़ावा देना और एक मजबूत भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड विकसित करना है।

15 लाख करोड़ के निर्यात और 60 हजार रोजगार का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि एमपीएमएस योजना के माध्यम से करीब 15 लाख करोड़ रुपये का मोबाइल फोन निर्यात होगा और 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इसके साथ ही मोबाइल फोन के लिए दूसरी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को भी मंजूरी दी गई है।

2026-27 से लागू होगी नई पीएलआई योजना

मोबाइल फोन के लिए नई पीएलआई योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी। इसके तहत पात्र बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार भारतीय कंपनियों के लिए अलग परियोजना भी संचालित करेगी, ताकि घरेलू ब्रांड वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति हासिल कर सकें।

आर्थिक विकास और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी गति

सरकार का मानना है कि सेमीकॉन 2.0 और एमपीएमएस जैसी योजनाएं देश में उच्च तकनीक विनिर्माण, निवेश, रोजगार और निर्यात को नई दिशा देंगी। साथ ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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