कवर्धा | रेंगाखार जंगल थाना क्षेत्र के चमरी गांव में हुए बहुचर्चित होम थिएटर ब्लास्ट केस में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आरोपी सरजू उर्फ संजू मरकाम (33) निवासी ग्राम छपला, बालाघाट (मध्य प्रदेश) को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। अब आरोपी को अपनी पूरी जिंदगी जेल में ही काटनी होगी और उसे उम्रकैद की सजा में किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी। अदालत ने यह फैसला 14 अगस्त को सुनाया।

जानिए, क्या है पूरा मामला
प्रकरण के अनुसार, आरोपी सरजू ललिता धुर्वे नाम की युवती से प्रेम करता था। लेकिन, ललिता की शादी किसी अन्य युवक हेमेन्द्र से तय हो गई थी। इस बात से नाराज होकर आरोपी ने पूरे परिवार को खत्म करने की खौफनाक साजिश रची। 31 मार्च 2023 को आरोपी का प्रेमिका के मंगेतर हेमेन्द्र से फोन पर विवाद भी हुआ था, जिसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम देने का षड्यंत्र रचा।
3 अप्रैल 2023 की सुबह करीब 9 बजे चमरी गांव में शादी वाले घर में होम थिएटर में जोरदार विस्फोट हुआ। कोर्ट ने माना कि सरजू ने होम थिएटर में खतरनाक विस्फोटक लगाकर उसे शादी के उपहार के रूप में भेजा था। जैसे ही घर में होम थिएटर का स्विच ऑन किया गया, एक भयंकर धमाका हुआ, जिसमें दूल्हे हेमेन्द्र और उसके भाई राजकुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
कोर्ट ने माना—पूरे परिवार को खत्म करने की थी साजिश
अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी सरजू को दो हत्याओं और 5 लोगों की हत्या के प्रयास का दोषी पाया गया। कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि आरोपी का मकसद सिर्फ दूल्हे हेमेन्द्र की हत्या करना नहीं था, बल्कि वह पूरे परिवार को समाप्त करना चाहता था। इस भीषण विस्फोट में घर के दो कमरे, दीवार, खपरैल और अन्य सामान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। टीवी, कूलर, अलमारी, पेटी, बर्तन, ड्रेसिंग टेबल, पलंग और गद्दे समेत घर का तमाम जरूरी सामान जलकर नष्ट हो गया।
कोर्ट को आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले, जिनमें होम थिएटर खरीदने की रसीद, भुगतान के दस्तावेज, गिफ्ट पैक कराने का सीसीटीवी फुटेज, मृतक हेमेन्द्र को किया गया फोन, गवाहों के बयान, एफएसएल (FSL) रिपोर्ट और आरोपी की निशानदेही पर हुई बरामदगी शामिल रही। इन सभी कड़ियों को जोड़ने के बाद अदालत ने माना कि अपराध सिर्फ और सिर्फ इसी आरोपी ने किया है। अदालत ने फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि आरोपी सरजू का अपराध अत्यंत गंभीर, क्रूर, बर्बर और समाज को झकझोर देने वाला है। बचाव पक्ष की ओर से पहली बार अपराध होने के आधार पर कम सजा देने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 307 के तहत आजीवन कारावास व 500 रुपए जुर्माना, तथा धारा 436 के तहत 10 साल सश्रम कारावास व 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
Author: Khabri Chai
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