रायपुर। छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा व्यवस्था में रिक्त पदों पर भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने नाराजगी जताई है। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों से लंबित मामलों की बिंदुवार जानकारी ली और समयसीमा के भीतर प्रक्रियाएं पूरी करने के सख्त निर्देश दिए।
बैठक में सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में भी तेजी लाने को कहा गया।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि भर्ती, पदोन्नति और शिक्षकों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विभागीय कामकाज में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
700 सहायक प्राध्यापक पदों की भर्ती में तेजी के निर्देश
समीक्षा बैठक में शासकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। इस दौरान सहायक प्राध्यापकों के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया में आ रही अड़चनों की जानकारी ली गई।
मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया में जहां भी प्रशासनिक या विभागीय स्तर पर समस्या आ रही है, उसका तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए जरूरी है।
इसके अलावा 595 रिक्त प्राध्यापक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को भी गति देने के निर्देश दिए गए।

15 सितंबर तक पूरी करनी होगी पदोन्नति प्रक्रिया
बैठक में शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक प्राचार्य के पदों पर लंबित पदोन्नति का मुद्दा भी उठा। पदोन्नति प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर मंत्री ने अधिकारियों से नाराजगी जताई।
उन्होंने निर्देश दिया कि 15 सितंबर 2026 तक पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए।
वहीं, ऐसे मामलों की भी समीक्षा की गई, जिनमें अपात्र होने के बावजूद प्राध्यापकों को पदोन्नति मिलने की शिकायत या मामला सामने आया है। मंत्री ने इन मामलों की जांच और संबंधित कार्रवाई की जानकारी भी अधिकारियों से मांगी।
वेतनमान के मामलों में देरी पर मंत्री नाराज
सहायक प्राध्यापकों के वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान से संबंधित लंबित मामलों पर भी बैठक में चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि विभागीय स्तर पर समय पर मामलों का निराकरण नहीं होने के कारण शिक्षकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। उन्होंने अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने विभाग में लंबित सभी न्यायालयीन मामलों और याचिकाओं की जानकारी भी मांगी। उन्होंने निर्देश दिया कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन मामलों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं।
शिक्षकों की PhD अनुमोदन प्रक्रिया की भी समीक्षा
बैठक के दौरान शिक्षकों की पीएचडी अनुमोदन प्रक्रिया की प्रगति की जानकारी भी ली गई। मंत्री ने अधिकारियों से अब तक हुई कार्रवाई और लंबित मामलों का ब्यौरा मांगा।
इसके अलावा मंत्री कार्यालय से उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई शिकायतों पर हुई कार्रवाई की भी विस्तृत जानकारी मांगी गई। अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निराकरण करने पर जोर दिया गया।
कॉलेजों के बजट की महाविद्यालयवार जानकारी मांगी
बैठक में वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए जाने पर मंत्री ने असंतोष जताया।
उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूरी सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि बजट आवंटन और उसके उपयोग से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए।
अतिथि व्याख्याताओं के काम का होगा निरीक्षण
महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों की नियमित निगरानी करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षण कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यप्रणाली की निगरानी करना है।
कॉलेजों में सीट बढ़ाने के लिए नया कैलेंडर
छात्र-छात्राओं को प्रवेश के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने की तैयारी है।
बैठक में सुझाव दिया गया कि शासकीय और निजी महाविद्यालयों से दिसंबर तक सीट वृद्धि के प्रस्ताव मंगाए जाएं और जनवरी तक स्वीकृति जारी करने की योजना बनाई जाए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य सीट वृद्धि से संबंधित आदेशों में होने वाली गलतियों और अंतिम समय में पैदा होने वाली प्रशासनिक समस्याओं को कम करना है।
लॉ और B.Ed. के ऑनलाइन आवेदनों का समय पर होगा निराकरण
बैठक में लॉ और बीएड जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े ऑनलाइन आवेदनों की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निर्धारित समयसीमा के भीतर निराकरण किया जाए। इससे विद्यार्थियों को प्रवेश और पाठ्यक्रम संबंधी प्रक्रियाओं में अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
4 वर्षीय B.Ed. को लेकर विशेष टीम दिल्ली जाएगी
चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसमें एनसीटीई दिल्ली की नैक ग्रेडिंग से संबंधित शर्तों पर विचार किया गया।
मंत्री ने इस विषय की विस्तृत जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया को समझने के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने के निर्देश दिए। टीम संबंधित नियमों और आवश्यकताओं का अध्ययन करेगी।
लॉ कॉलेजों में 60 विद्यार्थियों प्रति सेक्शन का नियम
बैठक में कानून की पढ़ाई से जुड़े संस्थानों के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों पर भी चर्चा हुई।
प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के निर्धारित अनुपात को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां पहले से शुरू करने के निर्देश दिए गए, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र में पाठ्यक्रम संचालन में किसी तरह की समस्या न आए।
उच्च शिक्षा व्यवस्था में तेजी लाने पर जोर
बैठक में हुई समीक्षा से स्पष्ट है कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा विभाग में लंबित भर्ती, पदोन्नति, वेतनमान और न्यायालयीन मामलों को समयसीमा में निपटाने पर जोर दे रही है।
एक ओर जहां 700 सहायक प्राध्यापकों और 595 प्राध्यापक पदों की भर्ती में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर कॉलेजों में प्रवेश, सीट वृद्धि, बजट, अतिथि व्याख्याताओं के कार्य और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े मामलों को भी समयबद्ध करने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय कार्यों में अनावश्यक देरी न हो और विद्यार्थियों तथा शिक्षकों से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए।
बैठक में सचिव अविनाश चंपावत, आयुक्त रीता यादव सहित उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
Author: Khabri Chai
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