छत्तीसगढ़: माओवादी संघर्ष विराम और शांति वार्ता प्रस्ताव

Khabri Chai Desk : छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है। माओवादी केंद्रीय कमेटी ने अस्थायी तौर पर हथियारबंद संघर्ष रोकने और सरकार से शांति वार्ता करने की पेशकश की है। नक्सलियों के इस पत्र को राज्य सरकार ने गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को सौंपा है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब तक यह प्रमाणित नहीं हो जाता कि पत्र वास्तव में माओवादी नेतृत्व से आया है, तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार शांति की समर्थक है, लेकिन किसी भी रणनीति या छल से सतर्क रहना आवश्यक है।

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माओवादी संगठन द्वारा भेजे गए इस पत्र में उल्लेख किया गया है कि मार्च 2025 से पार्टी सरकार के साथ वार्ता के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास कर रही है। 10 मई को जारी प्रेस बयान में माओवादी महासचिव ने पार्टी के हथियार छोड़ने का संकेत दिया था और सर्वोच्च नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श के लिए एक माह का समय मांगा था। इसके साथ ही, सरकार के सामने सीजफायर का प्रस्ताव भी रखा गया था।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नक्सल आंदोलन के भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब पूरा प्रदेश इस बात पर टकटकी लगाए है कि पत्र असली साबित होता है या नहीं और क्या वाकई छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का अंत संभव हो पाएगा।
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Author: Khabri Chai

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