
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन संकट गहराने के चलते पाकिस्तान सरकार ने देशभर में सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। इन फैसलों का उद्देश्य ऊर्जा की खपत को कम करना और सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद ये नए नियम लागू किए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, अब देश के अधिकांश हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे तक ही खुले रहेंगे। वहीं, रेस्टोरेंट, बेकरी और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य कर दिया गया है।
सरकार ने केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक ही सीमित न रहकर सामाजिक आयोजनों पर भी सख्ती दिखाई है। शादी हॉल, बैंक्वेट हॉल और अन्य कमर्शियल वेन्यू को रात 10 बजे के बाद संचालन की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा निजी स्तर पर आयोजित होने वाले शादी समारोहों और अन्य कार्यक्रमों पर भी यही समय सीमा लागू की गई है।
हालांकि, आवश्यक सेवाओं को इन पाबंदियों से बाहर रखा गया है। मेडिकल स्टोर और फार्मेसी को छूट दी गई है ताकि लोगों को दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी तरह की परेशानी न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों में ईंधन की कमी बढ़ गई है। इसी के चलते सरकार को ऊर्जा बचत के लिए ये कठोर कदम उठाने पड़े हैं।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और अहम मामला अमेरिका से सामने आया है। यहां भारतीय मूल के डॉक्टर जितेंद्र पटेल और उनकी अटलांटा स्थित क्लिनिक पर हेल्थकेयर फ्रॉड के आरोप लगे हैं। इस मामले में 14 मिलियन डॉलर (करीब 130 करोड़ रुपए) का सिविल समझौता किया गया है।
अमेरिकी न्याय विभाग की जांच में पाया गया कि क्लिनिक ने कई मरीजों पर जरूरत से ज्यादा जटिल मेडिकल प्रक्रियाएं कीं। साथ ही, कुछ मामलों में ऐसे टेस्ट और सर्जरी के बिल भी बनाए गए जो या तो आवश्यक नहीं थे या वास्तव में किए ही नहीं गए। इन आधारों पर मेडिकेयर और मेडिकेड जैसे सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से भुगतान लिया गया।
इस पूरे मामले की शिकायत क्लिनिक के पूर्व कर्मचारी और एक डॉक्टर द्वारा की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्लिनिक का मुख्य उद्देश्य मरीजों का उपचार नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाना था। हालांकि, समझौते के तहत डॉक्टर और क्लिनिक ने किसी भी आरोप को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन मामला निपटाने के लिए भारी राशि का भुगतान किया गया है।
Author: Khabri Chai
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