Khabri Chai Desk : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आउटर इलाके में स्थित एक मशरूम फैक्ट्री में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और मानवाधिकार हनन का बड़ा मामला सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों की संयुक्त कार्रवाई में 11 जुलाई को खरोरा थाना क्षेत्र स्थित “मारुति फ्रेश” मशरूम फैक्ट्री से 97 मजदूरों को रेस्क्यू किया गया।
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इनमें महिलाएं, पुरुष, नाबालिग बच्चे और मात्र 10 दिन का एक नवजात शिशु भी शामिल था। सभी मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से लाए गए थे। फैक्ट्री को “मोजो मशरूम” के नाम से जाना जाता है।
काम का झांसा, फिर अमानवीय बंधन
पीड़ितों ने बताया कि उन्हें “बैठकर मशरूम पैकिंग” का आसान काम और 10,000 रुपये मासिक वेतन देने का वादा कर गांवों से बुलाया गया था। लेकिन फैक्ट्री में 18 घंटे तक मशरूम काटने, ढोने और सफाई जैसे भारी काम करवाए गए। न नींद मिलती थी, न खाना ढंग से मिलता था। विरोध करने पर मारपीट आम थी।
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भागकर बचाई जान, फिर हुआ खुलासा
लगातार उत्पीड़न से तंग आकर कुछ मजदूर 2 जुलाई की रात चुपचाप फैक्ट्री से भाग निकले। 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलकर वे रायपुर के भाठागांव बस स्टैंड पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उनकी हालत देखकर पुलिस को सूचित किया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और फैक्ट्री पर छापा मारा गया।
FIR दर्ज, लेकिन फैक्ट्री मालिक पर अभी तक कार्रवाई नहीं

खरोरा पुलिस ने पीड़ित मजदूरों के बयान और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर चार ठेकेदारों – भोला, विपिन तिवारी, विकास तिवारी और नितेश तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनके खिलाफ बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम अधिनियम और IPC की गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है।
हालांकि, फैक्ट्री के मालिक पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिसे लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी व्यवस्था बिना मालिक की जानकारी के संभव नहीं।
मानवाधिकार संगठनों की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि फैक्ट्री मालिक को भी आरोपी बनाया जाए, साथ ही rescued मजदूरों को पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए। यह मामला न केवल मजदूर अधिकारों, बल्कि बाल सुरक्षा और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन का गंभीर उदाहरण बन गया है।
Author: Khabri Chai
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