
दुर्ग जिला, 18 फरवरी 2026 — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पेंशन से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां 15 रिटायर्ड कर्मचारियों ने खुद को मृत बताकर नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत करीब 1 करोड़ 19 लाख रुपये अवैध रूप से निकलवा लिए। मामले में ऑनलाइन सर्विस सेंटर के संचालक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। यह पूरा मामला पाटन थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, सभी 15 सेवानिवृत्त कर्मचारी अलग-अलग कंपनियों में कार्यरत रहे थे। उन्होंने अपनी पेंशन राशि निकालने के लिए ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालक से संपर्क किया। संचालक ने उन्हें 5 प्रतिशत कमीशन के बदले पूरी राशि निकालने का भरोसा दिया। इसके बाद आरोपी ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर खाताधारकों को मृत दर्शाते हुए बैंक और बीमा प्रक्रिया के जरिए पूरी रकम निकलवा ली।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बीएसपी के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर मृत्यु दावा किया गया, जबकि वह जीवित पाया गया। इस पर एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के मैनेजर को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि एनपीएस योजना में फर्जी मृत्यु दावा लगाकर बड़ी रकम निकाली गई है। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ

जांच में सामने आया कि ऑनलाइन सेवा केंद्र का संचालक राजेश कनोजिया (44) इस घोटाले का मास्टरमाइंड है। उसने खाताधारकों के दस्तावेज लेकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, केवाईसी और अन्य रिकॉर्ड तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर बीमा दावा कर राशि निकाली जाती थी। पुलिस ने आरोपी के पास से 10 हजार रुपये नकद और कई डिजिटल सबूत जब्त किए हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में एचडीएफसी लाइफ कंपनी का पूर्व कर्मचारी राजेश कुमार ठाकुर भी शामिल था। उसने अपने पद का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज अपलोड किए और सत्यापन प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दावे मंजूर कराए। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
नियमों के अनुसार, एनपीएस योजना में खाताधारक जीवित रहते अधिकतम 60 प्रतिशत राशि ही निकाल सकता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलती है। खाताधारक की मृत्यु के बाद पूरी राशि नॉमिनी को दी जाती है, लेकिन आरोपियों ने जीवित लोगों को मृत दिखाकर 100 प्रतिशत राशि निकाल ली।
जांच के दौरान कई फर्जी दावों में एक जैसे पते, अमान्य क्यूआर कोड वाले प्रमाण पत्र और संदिग्ध बैंक खातों के जरिए लेन-देन के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
Author: Khabri Chai
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