
महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर गोविंद गौ एवं जीव सेवा संस्थान एवं पंचगव्य अनुसंधान केंद्र मोहलाई के तत्वावधान में ग्राम मोहलाई में गौ वंश की रक्षा और उसके महत्व को लेकर गौ विज्ञान, स्वास्थ्य कथा एवं पंचगव्य चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, गौशाला से जुड़े कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पंचगव्य चिकित्सा पद्धति के संस्थापक एवं पंचगव्य गुरुकुलम कांचीपुरम के कुलपति डॉ. निरंजन वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने गौ रक्षा और गौ सेवा को भारतीय संस्कृति, धर्म और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूल आधार बताते हुए कहा कि गाय से प्राप्त दूध, दही, घी, गोबर और गौमूत्र से निर्मित पंचगव्य स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ कृषि के लिए उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में भी उपयोगी है।
उन्होंने बताया कि पंचगव्य उत्पाद रोगाणुनाशक गुणों से युक्त होते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं। साथ ही, यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक बताए जाते हैं। शिविर के दौरान स्वास्थ्य कक्षा का आयोजन भी किया गया, जिसमें लोगों को विभिन्न रोगों से संबंधित समस्याओं पर परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रश्नोत्तर सत्र में ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।
कार्यक्रम में गौ-सिद्ध डॉक्टर एसोसिएशन के सदस्य, गौशाला परिवार, ग्रामीणों सहित गायत्री परिवार के कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। इस दौरान गायत्री परिवार छत्तीसगढ़ युवा प्रकोष्ठ के प्रांतीय संयोजक ओमप्रकाश राठौर ने गौ वंश की वर्तमान स्थिति और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज से गौ संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में नारी जागरण आंदोलन की प्रमुख डॉ. कुंती साहू ने गौ वंश की सुरक्षा और उसके सामाजिक एवं आर्थिक महत्व पर विचार व्यक्त किए। सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में विधायक ललित चंद्राकर, उपजोन समन्वयक एसपी सिंह, रोमलाल, टीकम चंद्राकर और गौशाला प्रमुख मनीषा यादव सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य गौ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पंचगव्य आधारित स्वास्थ्य पद्धति को बढ़ावा देने और ग्रामीणों को प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करना है।
Author: Khabri Chai
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