Chhattisgarh कांग्रेस संगठन के भीतर इन दिनों सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष Deepak Baij का कार्यकाल अगस्त में समाप्त होना है, लेकिन उससे पहले ही संगठन में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर खेमेबाजी खुलकर सामने आने लगी है और राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के अंदर चल रही ‘कुर्सी की जंग’ के तौर पर देखा जा रहा है।सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डिप्टी सीएम T. S. Singh Deo की बढ़ती सक्रियता को लेकर है। सिंहदेव इन दिनों पूरे प्रदेश के तूफानी दौरे पर हैं। बिलाईगढ़, बालोद, कांकेर, कोरिया, रायगढ़, धमतरी समेत कई जिलों में वे लगातार कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल जनसंपर्क अभियान नहीं, बल्कि संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन भी है।सूत्रों के अनुसार सिंहदेव छोटे कार्यकर्ताओं तक सीधा संवाद स्थापित कर संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। कोयला खदान प्रभावितों से मुलाकात, कार्यकर्ताओं के घर पहुंचना और लगातार बैठकों का सिलसिला कांग्रेस के भीतर नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है।राजनीतिक चर्चाओं को और हवा तब मिली जब राहुल गांधी के साथ सिंहदेव की करीब 90 मिनट की बंद कमरे में हुई चर्चा की बातें सामने आईं। माना जा रहा है कि दिल्ली आलाकमान से मिले संकेतों के बाद ही सिंहदेव ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel का खेमा फिलहाल खुलकर सामने नहीं आ रहा, लेकिन अंदरखाने रणनीति पर तेजी से काम चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बघेल खेमा संगठन में संतुलन बनाने और सिंहदेव की बढ़ती दावेदारी को रोकने के लिए ‘आदिवासी कार्ड’ खेल सकता है। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री Amarjeet Bhagat का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में तेजी से उभर रहा है।

महिला कांग्रेस में हालिया नियुक्तियों को भी दोनों खेमों की ताकत और प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि कांग्रेस फिलहाल साफ तौर पर कई गुटों में बंटी नजर आ रही है और हर खेमा दिल्ली दरबार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यदि जल्द कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया तो संगठन के भीतर चल रही यह खींचतान आगामी चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल पूरे प्रदेश में टीएस सिंहदेव की सक्रियता और बघेल खेमे की रणनीतिक चुप्पी कांग्रेस की राजनीति को नए मोड़ की ओर ले जाती दिख रही है।
Author: Khabri Chai
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