फेडरेशन ने दीपावली से पहले लंबित महंगाई भत्ते का एरियर सहित भुगतान करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

‘एक राज्य, एक समान डीए’ लागू करने की मांग
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तारीख से महंगाई भत्ता लागू करती है, उसी तारीख से राज्य के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। उनका कहना है कि महंगाई का असर केंद्र और राज्य के कर्मचारियों पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए डीए लागू करने की तारीख में अंतर नहीं होना चाहिए।
इस संबंध में फेडरेशन मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को मांग पत्र सौंपने की तैयारी कर रहा है। संगठन ने सरकार से ‘एक राज्य, एक समान डीए’ की व्यवस्था लागू करने की अपील की है।
जुलाई 2026 से लंबित 3 प्रतिशत डीए स्वीकृत करने की मांग
फेडरेशन ने जुलाई 2026 से लंबित 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते को तत्काल स्वीकृत करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही जनवरी 2026 से 2 प्रतिशत डीए का लाभ देने के लिए जारी आदेश में संशोधन करने की मांग भी की गई है।
संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का लाभ उसी देय तारीख से मिलना चाहिए, जिस तारीख से केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को यह सुविधा देती है।
जीपीएफ खाते में जमा किया जाए पूरा एरियर
महंगाई भत्ते के बकाया भुगतान को लेकर फेडरेशन ने एक और महत्वपूर्ण मांग रखी है। संगठन चाहता है कि लंबित डीए की पूरी एरियर राशि कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते में जमा की जाए, ताकि कर्मचारियों को उनके बकाया का पूरा लाभ मिल सके।
इसके अलावा फेडरेशन ने राज्य के पेंशनरों को भी केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई राहत (DR) देने की मांग की है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कमल वर्मा ने कहा कि महंगाई का प्रभाव सभी पर समान रूप से पड़ता है। ऐसे में महंगाई भत्ते के भुगतान की तारीख में अंतर रखना उचित नहीं है। फेडरेशन ने सरकार से कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
अब कर्मचारियों की नजर सरकार के फैसले पर है। यदि दीपावली से पहले लंबित डीए और एरियर के भुगतान को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो प्रदेश में कर्मचारी संगठनों का आंदोलन तेज हो सकता है।
Author: Khabri Chai
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