
सुंदर पिचाई ने मंगलवार 18 फरवरी को नई दिल्ली में नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पिचाई ‘ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में भाग लेने भारत पहुंचे हैं। वे 20 फरवरी को इस वैश्विक सम्मेलन में की-नोट एड्रेस (मुख्य भाषण) देंगे। इस मुलाकात को भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में सहयोग और तकनीकी विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत पहुंचने के बाद पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि AI इम्पैक्ट समिट के लिए भारत लौटकर अच्छा लग रहा है और यहां हमेशा की तरह उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ। उनके दौरे को भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है।
‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन भारत मंडपम में किया जा रहा है। यह समिट 16 फरवरी से शुरू होकर 20 फरवरी तक चलेगी। इसमें 110 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, सरकारी नीति निर्माता, AI विशेषज्ञ, शिक्षाविद और टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स शामिल हो रहे हैं। यह ग्लोबल साउथ में आयोजित अपनी तरह का पहला वैश्विक AI सम्मेलन माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैश्विक मुद्दों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा को आगे बढ़ाना है।

न्यूज एजेंसी ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने आईटी उद्योग पर AI के बढ़ते प्रभाव और सरकार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत का आईटी सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार रहा है और AI इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर और चुनौती दोनों प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक भारत का आईटी सेक्टर 400 बिलियन डॉलर (करीब 33 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकता है, जिसमें AI आधारित आउटसोर्सिंग और ऑटोमेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
इस वैश्विक सम्मेलन की थीम राष्ट्रीय विजन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ पर आधारित है, जिसका उद्देश्य मानवता के कल्याण के लिए AI के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग को बढ़ावा देना है। समिट में 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 45 से अधिक मंत्री भाग ले रहे हैं।
समिट का विजन तीन प्रमुख स्तंभों — पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस — पर आधारित है। ‘पीपल’ के तहत मानव केंद्रित AI को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, ‘प्लैनेट’ के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ AI विकास सुनिश्चित करने की पहल की जा रही है, जबकि ‘प्रोग्रेस’ के जरिए समावेशी आर्थिक और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट वैश्विक स्तर पर AI नीति और तकनीकी सहयोग की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Author: Khabri Chai
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