रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क को लेकर पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच नेटवर्क के कथित नए तौर-तरीकों की जांच की जा रही है। अब तक जहां पैनल संचालन, सट्टा आईडी और पैसों के लेन-देन में युवकों की भूमिका की जानकारी सामने आती रही है, वहीं अब युवतियों को सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर नेटवर्क से जोड़ने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, रायपुर और दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से करीब 300 युवतियों के दूसरे राज्यों में जाने और उनके महादेव नेटवर्क से जुड़े होने की सूचना की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इनमें से कितनी युवतियों का वास्तव में ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से कोई संबंध रहा है।

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर नौकरी और कमाई का ऑफर
जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खासकर इंस्टाग्राम के जरिए कुछ युवतियों से संपर्क किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि शुरुआत में सामान्य बातचीत और दोस्ती के बाद उन्हें नौकरी या बेहतर कमाई का प्रस्ताव दिया जाता था।
इसके बाद कुछ युवतियों को दूसरे शहरों में बुलाकर ऑनलाइन काम दिए जाने की जानकारी की जांच की जा रही है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सोशल मीडिया पर संपर्क करने वाले लोग कौन थे, उन्हें किसने काम सौंपा और दूसरे शहरों में पहुंचने के बाद युवतियों को किस तरह की जिम्मेदारी दी गई।
करीब 300 युवतियों के दूसरे राज्यों में जाने की सूचना
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार रायपुर और दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से करीब 300 युवतियों के दूसरे राज्यों में जाने की बात कही जा रही है। इनमें हैदराबाद, पुणे, मुंबई और पश्चिम बंगाल सहित अन्य स्थानों का उल्लेख किया जा रहा है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि इन युवतियों की यात्रा, रहने की व्यवस्था और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों के पीछे कौन लोग थे। एजेंसियां सोशल मीडिया संपर्क, मोबाइल नंबर, डिजिटल लेन-देन और अन्य उपलब्ध जानकारियों को भी जांच के दायरे में ले सकती हैं।
हिमानी सहित कुछ लोगों की भूमिका की जांच
जांच के दौरान कुछ युवतियों और अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आने की जानकारी है। हिमानी नाम की एक युवती समेत तीन लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की बात कही जा रही है।
इसके अलावा फिरोज और अतुल नाम के लोगों के संपर्क भी जांच एजेंसियों की पड़ताल में बताए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अतुल के पहले महादेव सट्टा एप में मैनेजर के तौर पर काम करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन सभी लोगों की वास्तविक भूमिका और नेटवर्क से उनके संबंधों का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या कार्रवाई के बाद बदला गया नेटवर्क का तरीका?
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में जांच एजेंसियां लंबे समय से पैनल ऑपरेटरों, एजेंटों और अलग-अलग शहरों में संचालित कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही हैं। ऐसे में अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई बढ़ने के बाद नेटवर्क से जुड़े लोगों ने संचालन का तरीका बदला है या नहीं।
युवतियों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ने और अलग-अलग राज्यों में काम देने की सूचनाओं को भी इसी संभावित बदलाव के संदर्भ में जांचा जा रहा है। फिलहाल इसे लेकर पुलिस की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ED की कार्रवाई में हजारों करोड़ की संपत्तियां जांच के दायरे में
महादेव ऑनलाइन बुक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से भी लगातार कार्रवाई की गई है। एजेंसी के अनुसार मामले में अब तक करीब 4,336 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। ED ने 175 से अधिक ठिकानों पर तलाशी और 13 गिरफ्तारियों की जानकारी भी दी है।
मार्च 2026 में ED ने सौरभ चंद्राकर और उससे जुड़े लोगों की करीब 1,700 करोड़ रुपये की 20 अचल संपत्तियां अटैच किए जाने की जानकारी दी थी। एजेंसी के मुताबिक इनमें दुबई की 18 और नई दिल्ली की दो संपत्तियां शामिल थीं। दुबई की संपत्तियों में बुर्ज खलीफा स्थित एक अपार्टमेंट भी शामिल होने का दावा किया गया था।
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में जांच अभी जारी है। युवतियों से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, दूसरे राज्यों में भेजे जाने और कथित ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Author: Khabri Chai
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