शिक्षकों के हक की लड़ाई : पुरानी पेंशन के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाने को तैयार छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन (एमसीबी) ने शिक्षकों की लंबित मांगों और पुरानी पेंशन योजना (OPS) में पूर्व सेवा की गणना को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। स्वामी आत्मानंद हायर सेकेंडरी स्कूल, जनकपुर में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में संगठन ने साफ कर दिया कि हक की खातिर जरूरत पड़ी तो देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटा जाएगा। जिला अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रांतीय महासचिव प्रह्लाद सिंह और प्रांतीय संगठन मंत्री शिवकुमार यादव की विशेष मौजूदगी रही।

न्याय के लिए सर्वोच्च अदालत तक जाएंगे”

बैठक का सबसे बड़ा फैसला पुरानी पेंशन योजना को लेकर रहा। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि पूर्व सेवा की गणना के अधिकार को हासिल करने के लिए संगठन हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेगा और इसके लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।

इन 6 प्रमुख मांगों पर बनी आंदोलन की रणनीति

​बैठक में शिक्षकों के शोषण और प्रशासनिक पेचीदगियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने पर सहमति बनी। मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कर आगामी रणनीति तैयार की गई:

  • पुरानी पेंशन योजना (OPS): पूर्व सेवा अवधि की गणना को शामिल करने की मांग।
  • वेतन विसंगति व क्रमोन्नति: लंबे समय से लंबित वेतन विसंगतियों को दूर करना।
  • पदोन्नति: समयबद्ध प्रमोशन की प्रक्रिया को गति देना।
  • वीएसके (VSK) ऐप: ऐप से जुड़ी तकनीकी और व्यवहारिक समस्याओं का समाधान।
  • विशेष आकस्मिक अवकाश: अनुसूचित क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष लीव का प्रावधान।
  • मनोज कुमार गुप्ता को सर्वसम्मति से खड़गवां ब्लॉक अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
  • ​इसके साथ ही अयूब लाल और नरेश कुमार वर्मा सहित कई सक्रिय साथियों को जिला कार्यकारिणी में शामिल कर नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक सौंपेंगे ज्ञापन

​बैठक के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए पूरा संगठन एकजुट होकर कार्य करेगा। रणनीति के तहत आने वाले दिनों में विकासखंड (ब्लॉक) और जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर दबाव बनाया जाएगा, ताकि समस्याओं का प्रभावी और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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