रावण का पुतला दहन तो दुर्योधन का क्यों नहीं? मानवाधिकार आयोग में पहुंची शिकायत, जानिए क्या मिला जवाब

रायपुर। छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के सामने आमतौर पर सामाजिक बहिष्कार, प्रताड़ना, सफाई कर्मचारियों की समस्याओं और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामले पहुंचते हैं। लेकिन इस बार आयोग के सामने एक ऐसा सवाल आया, जिसका संबंध पौराणिक कथाओं से है। आवेदनकर्ता ने दशहरा के दौरान रावण के पुतले के दहन को मानवाधिकार के नजरिए से देखने का सवाल उठाया और पूछा कि अगर रावण का पुतला जलाया जाता है, तो महाभारत के पात्र दुर्योधन का पुतला क्यों नहीं जलाया जाता?

Dussehra 2025: रावण का दहन ही क्यों होता है, पुतला क्यों नहीं फूंका जाता?  जान लें कारण | Dussehra 2025 Why Ravana dahan only Know the reason and all  details about Ravana dahan

आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने सवाल किया कि यदि रावण को बुराई का प्रतीक मानकर हर साल उसका पुतला जलाया जाता है, तो क्या इसे उसके मानव अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है? शिकायत में यह तर्क भी रखा गया कि दुर्योधन को भी महाभारत में नकारात्मक और पापी पात्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, फिर उसका पुतला दहन क्यों नहीं किया जाता?

आयोग ने क्या दिया जवाब?

मामले पर आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि मानवाधिकार संरक्षण से जुड़े मामलों का दायरा मनुष्यों के अधिकारों से संबंधित है। शिकायतकर्ता को समझाया गया कि पौराणिक संदर्भ में रावण को मानव नहीं माना गया है, इसलिए उसका पुतला दहन मानवाधिकार आयोग के अधिकार क्षेत्र में आने वाला विषय नहीं है।

इस तरह यह शिकायत किसी मानवाधिकार उल्लंघन की कार्रवाई में तब्दील नहीं हुई, बल्कि पौराणिक पात्रों और आधुनिक मानवाधिकार की अवधारणा को जोड़कर पूछे गए एक असामान्य सवाल के रूप में सामने आई।

26 साल में आयोग के सामने आए करीब 74 हजार मामले

कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने आयोग के कामकाज से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि आयोग के गठन के बाद करीब 26 वर्षों में लगभग 74 हजार मामले सामने आए हैं। इनमें करीब 900 मामले अभी लंबित बताए गए हैं।

उन्होंने बताया कि आयोग के सामने आने वाले मामलों में सामाजिक बहिष्कार से जुड़े प्रकरणों की संख्या काफी अधिक है। ऐसे मामलों की हिस्सेदारी करीब 40 से 45 प्रतिशत तक बताई गई है। इनमें किसी व्यक्ति या परिवार को समाज से अलग करना, सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने देना, बातचीत बंद करना या सामाजिक और आर्थिक दबाव बनाने जैसी शिकायतें शामिल रहती हैं।

आयोग के सामने बड़ी संख्या में ऐसे मामले भी आते हैं, जिनकी जांच के बाद शिकायतें तथ्यहीन या फर्जी पाई जाती हैं। अध्यक्ष के अनुसार, करीब 3 से 4 हजार मामले ऐसे रहे हैं, जिन्हें फर्जी मामलों की श्रेणी में रखा गया।

रायपुर के करीब 1,800 सफाई कर्मचारियों की समस्याएं आयोग तक पहुंचीं

मानव अधिकार आयोग के सामने सफाई कर्मचारियों से जुड़ी समस्याएं भी बड़ी संख्या में पहुंची हैं। जानकारी के मुताबिक रायपुर में करीब 6 हजार सफाई कर्मचारी हैं, जिनमें से लगभग 1,800 कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतें आयोग तक पहुंचीं।

शिकायतों के बाद संबंधित नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए। इसके बाद कई मामलों में कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण किए जाने की जानकारी आयोग की ओर से दी गई।

सड़क हादसों को रोकने पर भी आयोग की पहल

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से आयोग ने आरटीओ और ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के साथ भी चर्चा की है। इसमें वाहन चालकों को प्रोत्साहित करने और अच्छे कार्य के लिए सम्मानित करने जैसे सुझावों पर चर्चा की गई।

आयोग के अनुसार प्रदेश में 10 से अधिक ट्रक रखने वाले करीब 3 हजार ट्रक मालिक हैं। इनके अधीन काम करने वाले करीब 30 हजार ट्रक ड्राइवरों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस की व्यवस्था कराने के संबंध में आयोग ने पत्र भी लिखा है।

कुष्ठ रोगियों के नए मामले भी सामने आए

ग्रामीण इलाकों में कुष्ठ रोग से जुड़े मामलों का भी आयोग ने संज्ञान लिया है। पहले प्रदेश में 3 हजार से अधिक कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई थी। बाद में दोबारा जांच के दौरान करीब 1,500 नए मामले सामने आने की जानकारी दी गई।

आयोग ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ चर्चा की है और आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया है।

सरेंडर नक्सलियों से भी आयोग ने की बातचीत

मानव अधिकार आयोग की टीम ने प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर स्कूलों, अस्पतालों, जेलों और थानों का निरीक्षण भी किया। बीजापुर दौरे के दौरान टीम ने सरेंडर कर चुके नक्सलियों से बातचीत की।

करीब 200 सरेंडर नक्सलियों से बातचीत के दौरान 9 ऐसे लोग सामने आए, जो बचपन में ही अनाथ हो गए थे। आयोग ने संबंधित कलेक्टरों से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी देखभाल, शिक्षा और सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

आयोग का कहना है कि ऐसे बच्चों को उचित संरक्षण और शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे परिस्थितियों के कारण दोबारा अपराध या गलत रास्ते की ओर न जाएं।

कुल मिलाकर, रावण के पुतला दहन से जुड़ी शिकायत जहां अपने अलग तरह के सवाल के कारण चर्चा में आई, वहीं आयोग के आंकड़े बताते हैं कि उसके सामने सामाजिक बहिष्कार, सफाई कर्मचारियों, सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास जैसे कई गंभीर मानवाधिकार से जुड़े मामले भी लगातार पहुंच रहे हैं।

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Author: Khabri Chai

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