रायपुर। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महाराष्ट्र-तेलंगाना सीमा से लगे आलापल्ली के जिमेला क्षेत्र में वन विभाग और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। 26 सितंबर को की गई इस कार्रवाई में कथित अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को पकड़ा गया। टीम ने उनके कब्जे से एक जीवित मादा पेंगोलिन और उसका नवजात बच्चा बरामद किया है। इसके अलावा 43 संदिग्ध बाघ की हड्डियां, दो कैनाइन दांत और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही तीन मोटरसाइकिलें भी जब्त की गई हैं।

गुप्त सूचना के बाद सीमावर्ती जंगल में घेराबंदी
जानकारी के मुताबिक, संबंधित एजेंसियों को इनपुट मिला था कि जिमेला इलाके में वन्यजीवों के अंगों और जीवित पेंगोलिन की कथित खरीद-फरोख्त के लिए कुछ लोग पहुंचने वाले हैं। सूचना मिलते ही संयुक्त टीम ने सीमावर्ती जंगल में निगरानी बढ़ाई और अलग-अलग स्थानों से घेराबंदी की।
मौके पर संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद टीम ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान छह लोगों को हिरासत में लिया गया। तलाशी में बैग से बाघ की संदिग्ध हड्डियां और दांत बरामद हुए, जबकि दो जीवित पेंगोलिन भी मिले। इनमें एक मादा पेंगोलिन और उसका नवजात बच्चा शामिल है।
चार एजेंसियों ने मिलकर चलाया अभियान
यह कार्रवाई वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के पश्चिमी क्षेत्र, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के एमपी-सीजी यूनिट, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) और आलापल्ली वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने की।
बताया गया है कि WCCB की ओर से वन्यजीव तस्करी के पैटर्न और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई गई, जबकि DRI ने अंतरराज्यीय आवाजाही और कथित व्यापारिक कड़ियों से संबंधित जानकारी पर काम किया। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग यूनिट ने फील्ड इंटेलिजेंस और स्थानीय नेटवर्क के जरिए इनपुट जुटाए। वहीं आलापल्ली वन विभाग ने स्थानीय स्तर पर घेराबंदी और जमीनी कार्रवाई को अंजाम दिया।
ऑपरेशन थंडर 2026 और सेफ पैसेज 3.0 के तहत कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के ऑपरेशन सेफ पैसेज 3.0 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ऑपरेशन थंडर 2026 के तहत की गई।
ऑपरेशन थंडर 2026 वन्यजीव और वन अपराध से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए INTERPOL और World Customs Organization (WCO) के समन्वय से चलाया जा रहा अभियान है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह अभियान 14 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है।
वहीं सेफ पैसेज अभियान का फोकस महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों और सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उन्हें बाधित करना है। पिछले अभियानों से मिले इनपुट के आधार पर महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से जुड़े कुछ वन्यजीव तस्करी मार्गों पर विशेष निगरानी की जा रही है।
बाघ की 43 हड्डियां और दो दांत बरामद
कार्रवाई के दौरान टीम को 43 संदिग्ध बाघ की हड्डियां और दो कैनाइन दांत मिले हैं। अधिकारियों ने जब्त अवशेषों को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरामद अवशेष वास्तव में बाघ के हैं या नहीं और उनका स्रोत क्या है।
बताया गया है कि बरामद सामग्री की जांच आगे की कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वन विभाग ने मामले में वन्यजीव अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई है।
मां और नवजात पेंगोलिन की बरामदगी
इस कार्रवाई में सबसे अहम बरामदगी जीवित पेंगोलिन की रही। टीम ने एक मादा पेंगोलिन के साथ उसके नवजात बच्चे को भी सुरक्षित बरामद किया। वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि पेंगोलिन की तस्करी के मामलों में जीवित जानवरों को पकड़कर उनके शल्क के लिए अवैध व्यापार किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
फिलहाल दोनों पेंगोलिन को वन विभाग की निगरानी में रखा गया है और उनके स्वास्थ्य एवं आगे की प्रक्रिया को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।
तस्करी नेटवर्क की आगे की जांच
छह संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद वन्यजीव अवशेष कहां से लाए गए थे और इन्हें आगे किसे सौंपा जाना था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर के लोगों के अलावा दूसरे राज्यों में सक्रिय बिचौलिये या खरीदार जुड़े हैं या नहीं।
तीन मोटरसाइकिलों की जब्ती से भी जांचकर्ताओं को कथित परिवहन नेटवर्क के बारे में सुराग मिलने की उम्मीद है। मामले में आगे की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
Author: Khabri Chai
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