दुर्ग/भिलाई। छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग और संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के ठाणे में संचालित कथित सट्टा नेटवर्क का खुलासा किया है। थाना वैशाली नगर और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने एक किराए के फ्लैट में दबिश देकर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इस फ्लैट से दो अलग-अलग ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग पैनल संचालित किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।

पुलिस की जांच में संदिग्ध बैंक खातों और ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई सुराग सामने आए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन किए जाने की आशंका है। पुलिस अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
ठाणे के फ्लैट से संचालित हो रहे थे दो सट्टा पैनल
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच थाना वैशाली नगर में दर्ज अपराध के बाद शुरू हुई थी। विवेचना के दौरान कुछ बैंक खातों में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले। तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि दुर्ग-भिलाई और धमतरी क्षेत्र के कुछ युवक महाराष्ट्र के ठाणे में किराए का फ्लैट लेकर ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग का संचालन कर रहे हैं।
जानकारी की पुष्टि के लिए पुलिस टीम ने ठाणे में दबिश दी। यहां एक फ्लैट में 10 आरोपी कथित तौर पर दो अलग-अलग सट्टा पैनलों का संचालन करते मिले। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन पैनलों के जरिए कितने लोगों से लेन-देन हुआ और इसमें कितनी रकम शामिल थी।
शिफ्ट में होता था काम, डिजिटल माध्यम से रखा जाता था हिसाब
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सट्टा पैनलों का संचालन शिफ्ट के आधार पर किया जाता था। आरोपी ऑनलाइन माध्यम से आपस में संपर्क और समन्वय करते थे। रोजाना के लेन-देन का हिसाब भी डिजिटल माध्यमों से रखे जाने की जानकारी मिली है।
पुलिस ने मौके से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। डिजिटल फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था, पैसों का हिसाब किस तरह रखा जाता था और इस गतिविधि से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों के नाम
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार बताई गई है:
-
विष्णु तिवारी (19)
-
अंकित निषाद (23)
-
नितेश कुमार (24)
-
नरेश कन्हाई (24)
-
दीपक कश्यप (27)
-
मेहुल निषाद (23)
-
हर्ष वर्धन निषाद (19)
-
संतोष राम (28)
-
भुवन लाल देवांगन (28)
-
चेतन ध्रुव (27)
पुलिस के मुताबिक, आरोपी छत्तीसगढ़ के भिलाई, धमतरी, कांकेर और बोरी क्षेत्र के अलावा बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। मामले में आरोपियों की कथित भूमिका और नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच जारी है।
31 मोबाइल और 4 लैपटॉप समेत कई सामान जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने फ्लैट से बड़ी संख्या में डिजिटल और बैंकिंग से जुड़े उपकरण बरामद किए हैं। जब्त सामग्री में शामिल हैं:
-
31 मोबाइल फोन
-
4 लैपटॉप
-
12 एटीएम कार्ड
-
2 पैन कार्ड
-
2 बैंक पासबुक
-
एक वाई-फाई/इंटरनेट उपकरण
-
पेन ड्राइव और पावर बैंक
-
चार्जर, विभिन्न केबल
-
नकदी और अन्य डिजिटल सामग्री
पुलिस इन उपकरणों में मौजूद डेटा, संपर्कों, बैंकिंग गतिविधियों और ऑनलाइन लेन-देन से संबंधित जानकारियों का विश्लेषण कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या होते हैं म्यूल बैंक खाते?
इस मामले में म्यूल बैंक खातों का पहलू भी जांच के केंद्र में है। म्यूल बैंक खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या समूह द्वारा संदिग्ध अथवा अवैध धन के लेन-देन के लिए किया जाता है। कई बार खाताधारक कमीशन या आर्थिक लालच में अपना खाता, एटीएम कार्ड या बैंकिंग जानकारी दूसरे लोगों को उपलब्ध करा देते हैं।
ऐसे खातों के माध्यम से रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसके वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में जब्त खातों का इस्तेमाल किस प्रकार हुआ और किन लोगों की इसमें भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
दुर्ग पुलिस अब यह पता लगा रही है कि जब्त किए गए बैंकिंग साधन किन लोगों के नाम पर हैं और उनसे जुड़े लेन-देन किन-किन खातों तक पहुंचे। करोड़ों रुपये के ट्रांजैक्शन से संबंधित जानकारी का भी विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
पुलिस का मानना है कि डिजिटल उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से नेटवर्क के दूसरे सदस्यों, संदिग्ध बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों का पता चल सकता है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि सट्टा पैनलों का संचालन कहां से नियंत्रित किया जा रहा था और रकम के लेन-देन में किन व्यक्तियों या खातों का इस्तेमाल हुआ।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई जारी है। पुलिस ने मामले से जुड़े डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
दुर्ग पुलिस की लोगों से अपील
दुर्ग पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड, यूपीआई या अन्य बैंकिंग साधन किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरों को करने देना कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन सट्टा-बेटिंग और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से दूर रहने तथा ऐसी किसी गतिविधि की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित करने की अपील की है।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





