अंबिकापुर के स्वामी आत्मानंद स्कूल में ₹1.32 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप, पूर्व CEO समेत 9 लोगों पर FIR के आदेश

अंबिकापुर में निर्माण कार्य की राशि को लेकर विवाद, कोर्ट के आदेश से बढ़ी हलचल

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज परिसर में निर्माण कार्य से जुड़ा कथित वित्तीय घोटाला सामने आया है। केशवपुर स्थित परिसर में हुए निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये की राशि के इस्तेमाल में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। मामले में अदालत ने तत्कालीन जनपद पंचायत CEO समेत कुल 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

निर्माण कार्य की राशि पर उठे सवाल

मामला केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल एवं कॉलेज परिसर में हुए निर्माण कार्य से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस काम के लिए 1 करोड़ 32 लाख 33 हजार रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान वित्तीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

मामले में माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र, तकनीकी स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कथित तौर पर दस्तावेजों में गड़बड़ी और सरकारी राशि के उपयोग में अनियमितता की बात कही गई है।

अब पुलिस जांच के दौरान निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और स्वीकृत राशि के इस्तेमाल की पड़ताल अहम होगी।

सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर अदालत पहुंचा मामला

इस प्रकरण में सामाजिक कार्यकर्ता अभय नारायण पांडे ने कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत की थी। खबर के मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जनपद पंचायत CEO समेत नौ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि निर्माण कार्य की प्रक्रिया में कहां-कहां गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

किन बिंदुओं पर हो सकती है जांच?

पुलिस जांच में निर्माण कार्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है:

  • निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि और वास्तविक खर्च का मिलान।

  • माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच।

  • तकनीकी स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा।

  • टेंडर, बिल और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल।

  • संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच।

इन जांच बिंदुओं से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सरकारी राशि के उपयोग में नियमों का पालन हुआ या नहीं।

FIR के आदेश के बाद आगे क्या?

अदालत के निर्देश के बाद अब मामले में पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। FIR दर्ज होने और जांच आगे बढ़ने पर संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और आरोपों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जाएगी। यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल, इस मामले में आरोपों को दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता। संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्कूल परिसर के निर्माण के लिए स्वीकृत ₹1.32 करोड़ की राशि का वास्तविक इस्तेमाल कैसे हुआ और कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है? इसका जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।

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Author: Khabri Chai

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