देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रही है। सर्दियों की शुरुआत के साथ हिमालय में स्थित चारों प्रमुख धाम—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। वर्ष 2026 के लिए कपाट बंद होने की तारीखें निर्धारित हो चुकी हैं। ऐसे में नवंबर में दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए यात्रा की तारीख और समय जानना बेहद जरूरी है।

चारों धाम के कपाट 10 नवंबर से 16 नवंबर के बीच बंद होंगे। सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट बंद होंगे, जबकि बद्रीनाथ धाम में सबसे आखिर में शीतकालीन समापन होगा।
चारों धाम के कपाट कब और कितने बजे होंगे बंद?
वर्ष 2026 में कपाट बंद होने का निर्धारित कार्यक्रम इस प्रकार है:
- गंगोत्री धाम: 10 नवंबर 2026, दोपहर 12:05 बजे।
- केदारनाथ धाम: 11 नवंबर 2026, सुबह 8:30 बजे।
- यमुनोत्री धाम: 11 नवंबर 2026, सुबह 10:28 बजे।
- बद्रीनाथ धाम: 16 नवंबर 2026, रात 9:37 बजे।
इन तारीखों के अनुसार, नवंबर के दूसरे सप्ताह में तीन धामों के कपाट बंद हो जाएंगे। बद्रीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को बंद होने के साथ इस वर्ष की चारधाम यात्रा का समापन होगा।
गंगोत्री से शुरू होगा कपाट बंद होने का सिलसिला
उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व के अवसर पर दोपहर 12:05 बजे बंद किए जाएंगे। यह मंदिर मां गंगा को समर्पित है और चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ावों में शामिल है।
इसके अगले दिन 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होंगे। केदारनाथ में सुबह 8:30 बजे और यमुनोत्री में सुबह 10:28 बजे कपाट बंद करने का समय निर्धारित किया गया है।
बद्रीनाथ धाम में 16 नवंबर को होंगे अंतिम दर्शन
चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर 2026 को रात 9:37 बजे शीतकाल के लिए बंद होंगे। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर चारधाम यात्रा का अंतिम प्रमुख पड़ाव है।
कपाट बंद होने की तिथि विजयादशमी के अवसर पर निर्धारित की गई थी। इसके बाद भगवान बद्रीविशाल की पूजा शीतकालीन परंपरा के अनुसार निर्धारित स्थानों पर जारी रहेगी।
सर्दियों में कहां होंगे चारों धाम के दर्शन?
कपाट बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना पूरी तरह बंद हो जाएगी। सर्दियों में चारों धामों की उत्सव मूर्तियों और पूजा परंपराओं को उनके निर्धारित शीतकालीन स्थलों पर जारी रखा जाता है।
- यमुनोत्री: खरसाली में मां यमुना की पूजा होती है।
- गंगोत्री: मुखबा गांव में मां गंगा की पूजा की जाती है।
- केदारनाथ: ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान केदारनाथ की पूजा होती है।
- बद्रीनाथ: ज्योतिर्मठ क्षेत्र के शीतकालीन पूजा स्थलों पर परंपरानुसार पूजा जारी रहती है।
इस व्यवस्था के कारण सर्दियों में भी श्रद्धालु संबंधित शीतकालीन स्थलों पर दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
जो श्रद्धालु नवंबर में दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें कपाट बंद होने की तारीखों के अनुसार यात्रा की योजना बनानी चाहिए। पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड, बर्फबारी या सड़क संबंधी बाधाएं यात्रा को प्रभावित कर सकती हैं।
यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान, सड़क की स्थिति, पंजीकरण और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों की जानकारी जरूर लें। कपाट बंद होने के दिन मंदिरों में दर्शन की व्यवस्था और भीड़ को देखते हुए पर्याप्त समय लेकर पहुंचना बेहतर होगा।
चारधाम यात्रा 2026 के अंतिम दिनों में श्रद्धालुओं के पास दर्शन का अवसर सीमित है। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय संबंधित मंदिर समिति की नवीनतम सूचना और निर्धारित समय की पुष्टि अवश्य करें।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





