बकाया भुगतान को लेकर किसानों ने तेज की आवाज
रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों के लंबित भुगतान का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। छत्तीसगढ़ किसान संघ ने ₹6,066 करोड़ की बकाया राशि जारी करने की मांग को लेकर ‘दाम सत्याग्रह किसान भुगतान यात्रा’ शुरू की है। किसान संघ के अध्यक्ष सुदेश टीकम के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा 26 से 31 अक्टूबर तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों से होकर गुजरेगी।

किसान संघ का कहना है कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले किसानों को उनकी लंबित राशि मिलनी चाहिए, ताकि वे आर्थिक परेशानियों से राहत पा सकें। संगठन ने सरकार से मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की है। यात्रा के दौरान किसान सभाएं आयोजित कर ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
छह दिनों में छह जिलों तक पहुंचेगा आंदोलन
किसान संघ ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा रायपुर से शुरू होकर धमतरी, कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर और नारायणपुर तक पहुंचेगी।
जिलेवार कार्यक्रम:
- 26 अक्टूबर: रायपुर
- 27 अक्टूबर: धमतरी
- 28 अक्टूबर: कांकेर
- 29 अक्टूबर: कोंडागांव
- 30 अक्टूबर: जगदलपुर
- 31 अक्टूबर: नारायणपुर
इन जिलों में किसान अपनी मांगों को लेकर बैठकें और सभाएं करेंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बकाया भुगतान का मुद्दा उठाया जाएगा।
₹6,066 करोड़ का बकाया कैसे हुआ? किसान संघ ने बताया हिसाब
किसान संघ के अध्यक्ष सुदेश टीकम के मुताबिक, बकाया राशि को लेकर संगठन ने तीन प्रमुख मदों का उल्लेख किया है।
1. खरीफ वर्ष 2024-25 का धान भुगतान: किसान संघ का दावा है कि 149 लाख टन धान की खरीदी पर ₹117 प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब ₹1,743 करोड़ की राशि लंबित है।
2. खरीफ वर्ष 2025-26 का धान भुगतान: संगठन के अनुसार, 141.04 लाख टन धान पर ₹186 प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब ₹2,623 करोड़ का भुगतान बाकी है। इसमें ₹117 और ₹69 प्रति क्विंटल की राशि शामिल बताई गई है।
3. राजीव गांधी किसान न्याय योजना: किसान संघ ने इस योजना के तहत ₹1,700 करोड़ की राशि भी लंबित होने का दावा किया है।
किसान संघ इन तीनों मदों को मिलाकर कुल ₹6,066 करोड़ जारी करने की मांग कर रहा है। ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं; भुगतान की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
धान का दाम ₹3,358 प्रति क्विंटल करने की मांग
बकाया राशि जारी करने के साथ किसान संघ ने इस साल धान का दाम ₹3,358 प्रति क्विंटल करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा संगठन समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने वाला कानून बनाने की मांग कर रहा है।
किसान संघ का कहना है कि लगातार मांग उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। संगठन को उम्मीद है कि जिलों में सभाओं और ज्ञापन के जरिए सरकार तक किसानों की बात पहुंचाई जा सकेगी।
दिवाली से पहले भुगतान की मांग, सरकार के फैसले पर नजर
किसानों के लिए लंबित भुगतान का मुद्दा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। त्योहार के समय खेती से जुड़े खर्च, घरेलू जरूरतें और आगामी फसल की तैयारी भी किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं। ऐसे में किसान संघ चाहता है कि सरकार बकाया राशि पर जल्द फैसला करे।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि दाम सत्याग्रह यात्रा के दौरान किसानों की मांगों पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और लंबित भुगतान को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।
Author: Khabri Chai
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