अंबिकापुर। सरगुजा और सूरजपुर जिले के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में एक लोनर हाथी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ‘कबरा’ नाम से पहचाने जा रहे इस हाथी के हमले लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। पिछले छह महीनों में इसके हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। रविवार शाम को भी हाथी ने महज दो घंटे के भीतर दो लोगों पर हमला कर उनकी जान ले ली। मृतकों में वन विभाग का दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी मानदेव और आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ कार्यालय सहायक विश्वनाथ शामिल हैं।

लगातार हो रही घटनाओं के बाद सीमावर्ती गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि जंगल और आसपास के इलाकों में हाथी की मौजूदगी के चलते कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं वन विभाग के सामने इस आक्रामक हाथी की गतिविधियों पर निगरानी रखने और मानव-हाथी संघर्ष रोकने की चुनौती बनी हुई है।
दो घंटे में दो लोगों की जान ली
रविवार शाम को कबरा हाथी ने दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों को कुचलकर मार डाला। दोनों घटनाएं करीब दो घंटे के अंतराल में हुईं। मृतकों में वन विभाग का कर्मचारी मानदेव और आदिम जाति कल्याण विभाग के कार्यालय सहायक विश्वनाथ शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि यह हाथी इंसानों को सामने देखकर आक्रामक हो जाता है। लगातार हमलों के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वन विभाग के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती हाथी की गतिविधियों पर नजर रखते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित रखना है।
खतरनाक हाथियों के लिए रमकोला में पुनर्वास केंद्र
सूरजपुर जिले के रमकोला में आक्रामक और खतरनाक हाथियों के प्रबंधन के लिए हाथी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित किया गया है। यहां ऐसे हाथियों को रखने की व्यवस्था है, जिनका व्यवहार इंसानी आबादी के लिए खतरा बन सकता है।
इस केंद्र में कर्नाटक से प्रशिक्षित हाथियों को भी लाया गया है। इनकी मदद से आक्रामक हाथियों के प्रबंधन और उनके व्यवहार में सुधार के प्रयास किए जाते हैं। वन विभाग जरूरत पड़ने पर कबरा हाथी को भी इसी केंद्र में रखने की प्रक्रिया अपना सकता है।
किन वजहों से आक्रामक हो सकते हैं हाथी?
हाथी विशेषज्ञ केके बिसेन के अनुसार, हाथियों के व्यवहार में आक्रामकता आने के पीछे कई प्राकृतिक और परिस्थितिजन्य कारण हो सकते हैं। झुंड से अलग हो जाना, असुरक्षा महसूस करना, मदकाल, भोजन और पानी की तलाश में परेशानी तथा इंसानी गतिविधियां इसके प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने बताया कि हाथियों के आसपास भीड़ जुटाना, शोर मचाना या उन पर पत्थर फेंकना भी उन्हें उग्र कर सकता है। ऐसी स्थिति में हाथी खुद को खतरे में महसूस कर हमला कर सकता है। इसलिए हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में लोगों को दूरी बनाए रखने और उन्हें परेशान नहीं करने की जरूरत है।
रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी, व्यवहार नहीं सुधरा तो होगा पुनर्वास
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), सरगुजा डॉ. प्रणव मिश्रा ने बताया कि कबरा हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए उसे रेडियो कॉलर लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए डीएफओ की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर अनुशंसा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।
उन्होंने कहा कि यदि हाथी के व्यवहार में सुधार नहीं होता है, तो उसे सूरजपुर जिले के रमकोला स्थित हाथी बचाव एवं पुनर्वास केंद्र में रखने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
वन विभाग का प्रयास है कि हाथी की गतिविधियों की प्रभावी निगरानी कर ग्रामीणों को समय रहते सतर्क किया जाए और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल कबरा हाथी के लगातार हमलों ने सरगुजा और सूरजपुर के वनांचल में दहशत का माहौल बना दिया है।
ग्रामीणों के लिए जरूरी सावधानी
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जंगल या हाथी की मौजूदगी वाले इलाकों में अकेले जाने से बचें।
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हाथी दिखाई देने पर उसके करीब जाने, फोटो लेने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें।
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हाथी को भगाने के लिए शोर न मचाएं और न ही पत्थर फेंकें।
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हाथी की सूचना तुरंत वन विभाग को दें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
Author: Khabri Chai
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