नैनो उर्वरक ने बदली किसान की तकदीर, धान उत्पादन बढ़ा और लागत हुई कम

 

Chhattisgarh में आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। महासमुंद जिले के बसना विकासखंड स्थित ग्राम दूधीपाली के प्रगतिशील किसान निरंजन सिदार ने धान की खेती में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत भी कम की है।

किसान निरंजन सिदार ने बताया कि उन्होंने धान की फसल में सबसे पहले नैनो डीएपी से बीज उपचार किया। इसके बाद फसल की वृद्धि अवस्था में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का छिड़काव किया गया। इसका सकारात्मक असर फसल पर देखने को मिला। फसल में रोग और कीटों का प्रकोप कम हुआ, पौधे अधिक स्वस्थ रहे और धान की गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया।

उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों में कमी आई। चूंकि नैनो उर्वरकों को कीटनाशकों के साथ मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है, इसलिए अलग-अलग बार खेत में श्रमिक लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

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कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार नैनो उर्वरक खेती में एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनुशंसित मात्रा और वैज्ञानिक विधि से उपयोग करने पर उत्पादन में वृद्धि, गुणवत्ता में सुधार और लागत में कमी जैसे लाभ मिलते हैं।

विभाग किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग के प्रति लगातार जागरूक कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

यह सफलता कहानी प्रदेश के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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Author: Khabri Chai

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