रायगढ़, 8 जून 2026। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की प्रस्तावित पेलमा ओपन कास्ट कोल माइन परियोजना के लिए सोमवार को ग्राम पेलमा में आयोजित लोक सुनवाई शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुई। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत आयोजित इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के तहत आयोजित इस लोक सुनवाई की अध्यक्षता अपर जिला दंडाधिकारी (एडीएम) अपूर्व प्रियेश टोप्पो ने की। वहीं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारी मानवेंद्र शेखर पांडेय की उपस्थिति में संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप संपन्न कराई गई।
प्रस्तावित पेलमा ओपन कास्ट कोल माइन परियोजना लगभग 2077.934 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जानी है। परियोजना की प्रस्तावित उत्पादन क्षमता 15 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) रखी गई है। परियोजना क्षेत्र का प्रभाव ग्राम पेलमा, उरबा, मडुआडूमर, लालपुर, हिंझर, जरिडीह, सक्ता, मिलूपारा और खर्रा सहित आसपास के कई गांवों पर पड़ने की संभावना है।
लोक सुनवाई के दौरान एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। अधिकारियों ने पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (ईआईए) रिपोर्ट, पर्यावरण प्रबंधन योजना तथा परियोजना से जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं की जानकारी आमजन के समक्ष रखी। साथ ही उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया गया।
जनसुनवाई में शामिल ग्रामीणों ने क्षेत्र के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आधारभूत संरचना से जुड़ी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त कीं। कई ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। स्थानीय लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में कहा कि यदि परियोजना का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप किया जाता है तो इससे क्षेत्र के समग्र विकास को बल मिलेगा। उन्होंने स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने और सामाजिक विकास योजनाओं का विस्तार करने की भी अपेक्षा व्यक्त की।
महिला प्रतिभागियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी दर्ज कराई। उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों, स्वरोजगार योजनाओं और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में इन पहलों को और व्यापक स्तर पर संचालित किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लोक सुनवाई का उद्देश्य परियोजना से प्रभावित और संबंधित क्षेत्रों के लोगों को अपनी राय रखने का अवसर प्रदान करना है। जनसुनवाई में प्राप्त सुझावों, आपत्तियों और मांगों को विधिवत रिकॉर्ड किया जाएगा और उन्हें पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़ी औद्योगिक परियोजना के लिए लोक सुनवाई एक महत्वपूर्ण चरण होती है, जहां स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। इससे परियोजना से जुड़े संभावित प्रभावों और जन अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलती है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन, पर्यावरण विभाग और परियोजना प्रबंधन के बीच समन्वय देखने को मिला। निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप संचालित हुई इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता ने इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण सार्वजनिक परामर्श बैठकों में शामिल कर दिया।
अब लोक सुनवाई की कार्यवाही और प्राप्त सुझावों को संबंधित प्राधिकरणों को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति से संबंधित आगामी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
Author: Khabri Chai
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