दुर्ग जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी रिकॉर्ड और मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन के बीच भारी अंतर सामने आया है। जिले के 68 उपार्जन केंद्रों में कुल 27 हजार 900 क्विंटल धान की गड़बड़ी पाई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत ढाई करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर जिले के धान उपार्जन केंद्रों का लगातार भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। अब तक 30 से 35 केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें कई जगह रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर पाया गया है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक तीन उपार्जन केंद्रों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जबकि एक मामले में गिरफ्तारी भी हुई है। संबंधित समिति प्रबंधकों और केंद्र प्रभारियों को चार दिनों के भीतर गायब धान या उसकी समतुल्य राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले में सामने आई यह गड़बड़ी सिर्फ आंकड़ों का अंतर नहीं, बल्कि पूरी धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह संभावना भी जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिकॉर्ड में दर्ज 27 हजार 900 क्विंटल धान आखिर कहां गया? और इस कथित गड़बड़ी के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं? पूरे मामले पर अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
Author: Khabri Chai
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