रायपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में पारदर्शिता बढ़ाने और राशन वितरण में हो रहे फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए खाद्य संचालनालय ने ओटीपी आधारित राशन वितरण व्यवस्था को लगभग पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब ई-केवाईसी पूर्ण होने वाले राशन कार्डधारकों को राशन लेने के लिए स्वयं उचित मूल्य दुकान पर उपस्थित होकर आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा।
जिला खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि जिन राशन कार्डों में परिवार के मुखिया और सभी सदस्यों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है, उन्हें केवल अंगूठे के बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही राशन मिलेगा। नॉमिनी के माध्यम से राशन लेने की स्थिति में भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य रहेगा और केवल ओटीपी के आधार पर राशन वितरण नहीं किया जाएगा।
हालांकि, विभाग ने कुछ विशेष श्रेणियों के हितग्राहियों को राहत दी है। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे, एकल निराश्रित एवं निशक्तजन हितग्राहियों को विशेष परिस्थितियों में ओटीपी के माध्यम से राशन प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

ओटीपी के जरिए हो रहा था फर्जीवाड़ा
खाद्य संचालनालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ओटीपी आधारित व्यवस्था का दुरुपयोग कर सरकारी चावल खुले बाजार में बेचा जा रहा है। कई मामलों में राशन कार्डधारकों से उनका ओटीपी खरीद लिया जाता था और उसके आधार पर राशन उठाकर बाजार में बेच दिया जाता था। कुछ स्थानों पर राशन दुकानों के माध्यम से भी इस तरह की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं।
बड़े शहरों में अधिक सामने आए मामले
विभागीय जानकारी के अनुसार, बड़े शहरों में ओटीपी के जरिए फर्जीवाड़ा सबसे ज्यादा देखने को मिला। खासकर ऐसे एपीएल राशन कार्डधारक, जो नियमित रूप से राशन नहीं लेते थे, वे अपने मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के बदले नकद राशि लेकर दूसरों को उपलब्ध करा देते थे। इसके बाद उनके नाम पर राशन निकाल लिया जाता था।
नियम उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत आधार आधारित प्रमाणीकरण से ही राशन वितरण किया जाएगा। यदि कोई उचित मूल्य दुकान संचालक नए नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
नए नियम से सरकारी राशन की कालाबाजारी पर अंकुश लगने और वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक खाद्यान्न की पारदर्शी तरीके से पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Author: Khabri Chai
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