रायपुर: दुनियाभर में मौसम के बदलते मिजाज और तेजी से बढ़ती गर्मी ने वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्ट्स और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ‘अलनीनो’ (El Niño) के खतरनाक असर के कारण भारत सहित पूरे एशिया में सूखे, अकाल और बेकाबू महंगाई का एक बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका है। इस मौसमी बदलाव के चलते अकेले भारत को साल 2032 तक करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 94 लाख करोड़ रुपये (94,55,960{ करोड़}) का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल नवंबर 2026 से लेकर जनवरी 2027 के बीच अलनीनो का प्रभाव अपने चरम पर होगा। आमतौर पर जुलाई से सितंबर के दौरान इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है, जो सीधे तौर पर देश की कृषि और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

अलनीनो के इस चक्रवाती और सूखे के प्रभाव से भारत के करीब 12 राज्य सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश।
इन राज्यों में व्यापक स्तर पर मानसूनी खेती प्रभावित होने की आशंका है, जिससे उन किसानों पर सबसे बड़ी मार पड़ेगी जिनके पास सिंचाई के आधुनिक या वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं हैं।
सिर्फ खेती ही नहीं, इन सेक्टर्स पर भी पड़ेगा सीधा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, यह नुकसान केवल मौसम और फसलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका चौतरफा असर देखने को मिलेगा।
भीषण गर्मी और सूखे से ग्रामीण अर्थव्यवस्था टूटेगी, जिससे रोजगार के अवसर कम होंगे। साथ ही, हीटवेव और जल संकट के कारण स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ेंगी।
गर्मी बढ़ने और पानी की कमी के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी, जिससे बिजली संकट और महंगे टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। फसलों के नुकसान से अनाज, दलहन और चारे की भारी कमी होगी, जिससे आने वाले समय में दूध, सब्जियों और राशन के दामों में बेकाबू बढ़ोतरी हो सकती है।
Author: Khabri Chai
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