नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय बैंक ने घोषणा की है कि अप्रैल-मई 2027 के दौरान भारत में पॉलीमर (प्लास्टिक) नोट जारी किए जाएंगे। पहले चरण में कम मूल्य वाले नोट बाजार में उतारे जाएंगे, क्योंकि इनका उपयोग सबसे अधिक होता है और ये सबसे जल्दी खराब भी हो जाते हैं।

आरबीआई का मानना है कि पॉलीमर नोटों से मुद्रा अधिक टिकाऊ होगी, नकली नोटों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और नोटों की बार-बार छपाई पर होने वाला सरकारी खर्च भी कम होगा।
MPC बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दी जानकारी
यह घोषणा आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में पॉलीमर नोट वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं और अब भारत भी इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पहले चरण में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट
आरबीआई के अनुसार शुरुआती चरण में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट पॉलीमर सामग्री पर छापे जाएंगे। ये नोट बाजार में सबसे अधिक प्रचलन में रहते हैं और कम समय में फटने या गंदे होने के कारण बार-बार बदलने पड़ते हैं। नई तकनीक से बने पॉलीमर नोट अधिक समय तक सुरक्षित रहेंगे और उनकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी।

क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट विशेष प्रकार की प्लास्टिक आधारित सामग्री से बनाए जाते हैं। देखने और उपयोग में ये सामान्य कागजी नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन उनकी मजबूती कई गुना अधिक होती है।
इन नोटों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पानी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और धूल या गंदगी का असर भी इन पर कम पड़ता है। इसी कारण इनकी उपयोग अवधि पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में काफी लंबी होती है।
नकली नोटों पर लगेगी प्रभावी रोक
पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें नकली तरीके से तैयार करना बेहद मुश्किल माना जाता है। आरबीआई का मानना है कि इससे जाली नोटों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। इस कदम से बैंकिंग प्रणाली अधिक सुरक्षित होगी और नकली मुद्रा के जरिए होने वाले आर्थिक अपराधों में भी कमी आने की उम्मीद है।
नोटों की छपाई पर घटेगा सरकारी खर्च
छोटे मूल्य के कागजी नोट जल्दी खराब होने के कारण आरबीआई को हर वर्ष बड़ी संख्या में नए नोट छापने पड़ते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर लगभग 6,372 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलेंगे, जिससे पुराने नोटों को बार-बार बदलने की आवश्यकता कम होगी और सरकार की छपाई लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
पुराने कागजी नोट रहेंगे पूरी तरह वैध
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोट आने का मतलब वर्तमान कागजी नोटों का बंद होना नहीं है। पुराने और नए दोनों प्रकार के नोट एक साथ चलन में रहेंगे। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
2012 में शुरू हुई थी पहल, अब मिलेगा अमलीजामा
भारत में पॉलीमर नोट लाने की चर्चा नई नहीं है। वर्ष 2012 में पहली बार इस दिशा में पहल की गई थी, लेकिन तकनीकी और उत्पादन संबंधी चुनौतियों के कारण योजना आगे नहीं बढ़ सकी। हाल के वर्षों में आरबीआई ने दोबारा इस तकनीक का अध्ययन किया और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का मूल्यांकन करने के बाद अब इसे लागू करने का निर्णय लिया है।
60 से अधिक देशों में पहले से सफल
आज दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर नोट सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया इस तकनीक को अपनाने वाला पहला प्रमुख देश था। इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने भी पॉलीमर नोटों को अपनाया। इन देशों में इन नोटों ने टिकाऊपन, बेहतर सुरक्षा और कम रखरखाव लागत के कारण सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
भारत में मुद्रा व्यवस्था में बड़े बदलावों का इतिहास
आजादी के बाद भारत में कई बार मुद्रा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं।
1946: पहली बार बड़े मूल्य के नोट बंद किए गए।
1978: 1000, 5000 और 10000 रुपये के नोट वापस लिए गए।
2016: 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों का विमुद्रीकरण कर नए नोट जारी किए गए।
2023: क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2000 रुपये के नोटों को धीरे-धीरे सर्कुलेशन से वापस लेने का फैसला लिया गया।
2027: अब पॉलीमर नोटों की शुरुआत भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक और बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
आम लोगों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार पॉलीमर नोटों से आम नागरिकों को कई लाभ मिलेंगे। नोट जल्दी खराब नहीं होंगे, लंबे समय तक उपयोग किए जा सकेंगे और नकली नोटों की समस्या में कमी आने से लेन-देन अधिक सुरक्षित होगा।
इसके अलावा नोटों की छपाई पर होने वाला सरकारी खर्च कम होने से अर्थव्यवस्था को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। हालांकि शुरुआती दौर में लोगों को नए नोटों की बनावट और सुरक्षा विशेषताओं के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने की संभावना है।
Author: Khabri Chai
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