बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब फर्जी तरीके से मुआवजा राशि हड़पने वालों के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिला प्रशासन ने इस मामले से जुड़ी सभी 17 फाइलों को दोबारा खोल दिया है और फर्जी मुआवजा लेने वालों से राशि की वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। तहसील स्तर पर गठित विशेष प्रशासनिक टीम एक-एक प्रकरण की बारीकी से पुनर्समीक्षा कर रही है।

जानिए क्या है पूरा मामला?
शासन द्वारा प्राकृतिक आपदा या सर्पदंश से हुई मौत पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसी का फायदा उठाकर दलालों के एक संगठित गिरोह ने फर्जीवाड़ा किया। इस मामले में तहसील कार्यालय में पदस्थ तीन लिपिक, सिम्स की महिला चिकित्सक, दो नगर सैनिक, अधिवक्ता और मुआवजा पाने वाले कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच में यह सामने आया था कि कुल 17 मामले पूरी तरह फर्जी थे, जिनमें तहसील कार्यालय से जारी फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे शासन के खजाने को चूना लगाया गया था। अब इस फर्जीवाड़े की आंच सीधे तौर पर उन लाभार्थियाें और सिंडिकेट तक पहुंच गई है, जिन्होंने दलालों और भ्रष्ट कर्मचारियों की सांठगांठ से यह राशि स्वीकृत कराई थी। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से फर्जी मुआवजा लेने वालों में हड़कंप मच गया है।
Author: Khabri Chai
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