बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्कूल के मध्यान्ह भोजन को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्याशाला बेमेतरा में बच्चों को परोसे जा रहे मध्यान्ह भोजन में कथित तौर पर डामर की गोली मिलने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद एहतियात के तौर पर छठवीं कक्षा के 26 बच्चों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी की जांच की। राहत की बात यह है कि फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

भोजन से आई डामर जैसी गंध, तत्काल रोका गया वितरण
जानकारी के अनुसार स्कूल में घटना के दिन कुल 213 बच्चे उपस्थित थे और सभी के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार किया गया था। सबसे पहले छठवीं कक्षा के बच्चों को भोजन परोसा गया। इसके बाद अन्य कक्षाओं के बच्चों को भोजन दिया जाना था।
इसी दौरान भोजन से डामर जैसी असामान्य गंध आने की जानकारी सामने आई। स्कूल प्रबंधन को इसकी सूचना मिलते ही बाकी बच्चों को भोजन परोसने से तत्काल रोक दिया गया।
जिन 26 बच्चों ने भोजन कर लिया था, उन्हें भी किसी संभावित स्वास्थ्य समस्या से बचने के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया।
रसोइया को भी महसूस हुई थी गंध, उठे सवाल
मामले में यह बात भी सामने आ रही है कि भोजन तैयार करने वाली रसोइया ने कथित तौर पर भोजन चखने के दौरान डामर जैसी गंध महसूस की थी। इसके बावजूद तत्काल स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
बाद में बच्चों की ओर से भी भोजन में असामान्य गंध महसूस किए जाने के बाद मामला सामने आया और भोजन वितरण रोक दिया गया।
इस घटनाक्रम ने मध्यान्ह भोजन की निगरानी और गुणवत्ता जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भोजन में पहले ही असामान्य गंध महसूस हो गई थी, तो उसी समय भोजन को बच्चों तक पहुंचने से क्यों नहीं रोका गया, यह जांच का अहम बिंदु है।
रसोइया के बच्चे के खेलने के दौरान गोली गिरने की बात
प्रारंभिक जानकारी में यह बात सामने आई है कि रसोइया के बच्चे के साथ कथित तौर पर डामर की गोली आई थी और खेलने के दौरान वह गोली भोजन में गिर गई।
हालांकि, यह फिलहाल प्रारंभिक जानकारी है। डामर की गोली वास्तव में भोजन में कैसे पहुंची और इसमें किस स्तर पर लापरवाही हुई, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
26 बच्चों का कराया गया स्वास्थ्य परीक्षण
घटना के बाद छठवीं कक्षा के 26 बच्चों को जिला अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने सभी बच्चों की जांच की। फिलहाल किसी बच्चे में गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने नहीं आई है और सभी बच्चों की हालत सामान्य बताई जा रही है।
स्कूल प्रबंधन ने भी एहतियात बरतते हुए बाकी बच्चों को भोजन परोसना रोक दिया।
स्कूल में 273 बच्चे दर्ज, 213 थे उपस्थित
संस्था प्रमुख रामेश्वर बंजारे के मुताबिक स्कूल में कुल 273 बच्चे दर्ज हैं। घटना के दिन इनमें से 213 बच्चे स्कूल में मौजूद थे। इन सभी बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार किया गया था।
प्रथम दृष्टया रसोइया की लापरवाही की बात सामने आने की जानकारी है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश
मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अभय जायसवाल ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मामले की जांच के लिए सहायक उपसंचालक को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
जांच में भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री की सुरक्षा, रसोई की व्यवस्था, भोजन तैयार करने की प्रक्रिया और बच्चों को भोजन परोसने से पहले निगरानी सहित सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ा होता है, इसलिए भोजन की तैयारी से लेकर वितरण तक हर स्तर पर सख्त निगरानी जरूरी है।
फिलहाल 26 बच्चों की हालत सामान्य है, जो राहत की बात है। लेकिन अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि डामर की कथित गोली भोजन में आखिर कैसे पहुंची और इस पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
Author: Khabri Chai
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