रायपुर। देशभर में चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान आम जनता के लिए राहत की खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी चीनी की कीमतों में अब बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप, आपूर्ति बढ़ाने के फैसले और बाजार पर निगरानी सख्त करने के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमत करीब 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गई है।
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कुछ समय पहले यही कीमत बढ़कर करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। यानी रिकॉर्ड स्तर की तुलना में एक्स-मिल कीमत में करीब 12 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने PTI को बताया कि चीनी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि बाजार में आपूर्ति सामान्य होने और आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ने के बाद आने वाले दिनों में कीमतों पर और दबाव कम हो सकता है।
15 दिनों में अचानक बढ़ गए थे चीनी के दाम
चीनी बाजार में पिछले करीब 15 दिनों के दौरान अचानक तेजी देखने को मिली थी। इस दौरान चीनी की एक्स-मिल कीमत बढ़कर रिकॉर्ड करीब 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
कीमतों में तेजी का असर थोक बाजार के साथ-साथ धीरे-धीरे खुदरा बाजार पर भी पड़ने लगा था। मिल स्तर पर कीमत बढ़ने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हुई और इसका असर कारोबारियों से होते हुए आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा।
खाद्य सचिव के मुताबिक, कीमतों में अचानक आए इस उछाल के पीछे चीनी मिलों की ओर से कीमतों में की गई बढ़ोतरी प्रमुख वजहों में शामिल थी।
सरकार ने उठाए दो बड़े कदम
चीनी की कीमतों में अचानक तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में हस्तक्षेप किया। आपूर्ति मजबूत करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से दो प्रमुख कदम उठाए गए।
पहला फैसला—चीनी के आयात की अनुमति: घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार ने चीनी के आयात को मंजूरी दी। इससे बाजार में संभावित कमी की आशंका कम हुई और अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध होने की उम्मीद बढ़ी।
दूसरा फैसला—जमाखोरी और सट्टेबाजी पर सख्ती: सरकार ने चीनी के स्टॉक, जमाखोरी और सट्टेबाजी पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया। इसका उद्देश्य कृत्रिम कमी पैदा कर कीमत बढ़ाने और मुनाफाखोरी की कोशिशों पर लगाम लगाना है।
67 रुपये से सीधे 55 रुपये किलो हुई एक्स-मिल कीमत
सरकार के कदमों का असर अब चीनी बाजार में दिखाई देने लगा है। जिस चीनी की एक्स-मिल कीमत कुछ समय पहले 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर करीब 55 रुपये प्रति किलो रह गई है।
इस तरह रिकॉर्ड स्तर की तुलना में कीमत करीब 12 रुपये प्रति किलो कम हुई है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो यह लगभग 18 फीसदी की गिरावट है।
सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और नरमी आ सकती है। जैसे-जैसे आयातित चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध होगी और सप्लाई चेन सामान्य होगी, एक्स-मिल कीमतों पर और दबाव बनने की संभावना है।
क्या आम जनता को भी मिलेगा सीधा फायदा?
एक्स-मिल कीमत में गिरावट का असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है। चीनी मिल से निकलकर पहले थोक व्यापारियों तक पहुंचती है और उसके बाद खुदरा बाजार में जाती है।
ऐसे में एक्स-मिल कीमत घटने के बाद थोक और फिर खुदरा बाजार में भी कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, खुदरा बाजार में वास्तविक कीमत कितनी घटेगी, यह स्थानीय सप्लाई, व्यापारियों के मार्जिन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
अगर मौजूदा गिरावट का लाभ पूरी सप्लाई चेन में आगे तक पहुंचता है, तो आने वाले दिनों में किराना दुकानों पर उपभोक्ताओं को चीनी कुछ सस्ती मिल सकती है।
सरकार की बाजार पर पैनी नजर
चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी के बाद केंद्र सरकार ने बाजार की निगरानी बढ़ा दी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतों को प्रभावित न किया जा सके।
फिलहाल 67 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड एक्स-मिल स्तर से चीनी का भाव 55 रुपये प्रति किलो तक आना उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में आयातित चीनी की उपलब्धता और घरेलू सप्लाई की स्थिति यह तय करेगी कि कीमतों में आई यह नरमी कितनी आगे तक जारी रहती है।
Author: Khabri Chai
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