CG News: सुबह 5 बजे दौड़, दिनभर पिता के साथ मजदूरी और फिर पढ़ाई… दो सगे भाइयों का CRPF में एक साथ चयन

धमतरी/मगरलोड। मेहनत और मजबूत इरादों के आगे आर्थिक परेशानियां भी छोटी पड़ जाती हैं। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक स्थित ग्राम दुधवारा के दो सगे भाइयों ने इसे सच साबित कर दिखाया है। पवन नेताम (22) और नकुल नेताम (19) का एक साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में चयन हुआ है।

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद दोनों भाइयों ने अपने पिता के साथ मजदूरी और मिस्त्री का काम किया। इसके साथ ही उन्होंने पढ़ाई और फोर्स में भर्ती की तैयारी भी जारी रखी। करीब दो साल की लगातार मेहनत के बाद दोनों भाइयों ने अपने पहले प्रयास में CRPF में चयन हासिल किया।

Two brothers, who used to lift bricks and cement, became CRPF jawans  together.

सुबह 5 बजे उठकर लगाते थे 5 किलोमीटर दौड़

पवन और नकुल ने बताया कि भर्ती की तैयारी के दौरान उनकी दिनचर्या काफी कठिन थी। दोनों रोजाना सुबह करीब 5 बजे उठते थे और करीब 5 किलोमीटर दौड़ लगाते थे। सुबह 6 बजे तक दौड़ पूरी करने के बाद घर लौटकर पढ़ाई करते थे।

इसके बाद सुबह करीब 9 से 10 बजे के बीच दोनों अपने पिता के साथ मिस्त्री के काम पर निकल जाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति में सहयोग करने के लिए उन्होंने मजदूरी को अपनी तैयारी में बाधा नहीं बनने दिया।

निर्माण कार्य के दौरान दोनों सीमेंट और ईंटें ढोने, निर्माण सामग्री पहुंचाने और मिस्त्री के काम में सहयोग करने जैसे काम करते थे। दिनभर मेहनत करने के बाद शाम को घर लौटते और आराम के बाद फिर भर्ती की तैयारी में जुट जाते थे।

मजदूरी के साथ पढ़ाई और फोर्स की तैयारी

दोनों भाइयों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक स्थिति थी। परिवार की सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। काम के साथ उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस और पढ़ाई पर भी लगातार ध्यान दिया।

करीब दो वर्षों तक यही दिनचर्या चलती रही—सुबह दौड़, दिन में मजदूरी और समय निकालकर पढ़ाई व भर्ती की तैयारी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और दोनों भाइयों का एक साथ CRPF में चयन हो गया।

उम्र में तीन साल का अंतर, लेकिन तैयारी में रहे साथ

पवन और नकुल की उम्र में करीब तीन साल का अंतर है। पवन स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, जबकि नकुल BSc द्वितीय वर्ष के छात्र हैं।

अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के बावजूद दोनों ने तैयारी के दौरान एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। वे एक-दूसरे के लिए दोस्त और सहयोगी बने रहे। पढ़ाई, दौड़ और शारीरिक तैयारी में दोनों साथ अभ्यास करते थे और एक-दूसरे की कमियों को सुधारने की कोशिश करते थे।

इसी तालमेल और मेहनत का नतीजा रहा कि दोनों भाइयों ने पहले ही प्रयास में CRPF में चयन हासिल कर लिया।

चेन्नई में शुरुआती ट्रेनिंग पूरी कर गांव लौटे

चयन के बाद दोनों भाइयों ने चेन्नई में ट्रेनिंग के पहले चरण को पूरा किया। इसके बाद 7 सितंबर को वे अपने गांव दुधवारा लौटे।

दोनों के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मगरलोड से दुधवारा तक करीब 7 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। देशभक्ति के गीतों और डीजे की धुन के बीच ग्रामीण नाचते-गाते हुए दोनों भाइयों के स्वागत में शामिल हुए।

रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पिता बोले- बेटों की सफलता पर गर्व है

पिता राजाराम नेताम ने दोनों बेटों की सफलता पर खुशी और गर्व जताया। उन्होंने बताया कि दोनों ने शुरुआती ट्रेनिंग पूरी कर ली है। कुछ दिनों तक घर पर रहने के बाद दोनों भाई दोबारा चेन्नई जाएंगे, जहां उन्हें करीब 6 महीने की एडवांस ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।

परिवार के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों भाइयों ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी दोनों भाइयों की कहानी

पवन और नकुल नेताम की कहानी केवल CRPF में चयन की खबर नहीं है, बल्कि संघर्ष और संकल्प की मिसाल भी है। सुबह दौड़ लगाना, दिनभर पिता के साथ मजदूरी करना, पढ़ाई के लिए समय निकालना और फिर फोर्स की तैयारी करना—दोनों ने करीब दो साल तक इसी कठिन दिनचर्या को जारी रखा।

दोनों भाइयों ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत को दिया। उनका कहना है कि आर्थिक परेशानियां जरूर सामने आईं, लेकिन परिवार ने उनका हौसला नहीं टूटने दिया।

अब दोनों भाई एडवांस ट्रेनिंग पूरी करने के बाद देश सेवा की अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ दुधवारा और आसपास के क्षेत्र के युवाओं में भी उत्साह और गर्व का माहौल है।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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