जगदलपुर, 9 सितंबर 2026। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा 2026 को इस बार और भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। करीब 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व की तैयारियों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में पर्व की परंपराओं के संरक्षण, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ-साथ बस्तर दशहरा को UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद और बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। इस दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आशुतोष छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, जिला पंचायत CEO नम्रता चौहान सहित मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरान, पुजारी, प्रशासनिक अधिकारी और समिति के सदस्य मौजूद रहे।
बलराम मांझी बने दशहरा समिति के नए उपाध्यक्ष
बैठक की शुरुआत समिति के उपाध्यक्ष पद के निर्वाचन से हुई। चचेड़ी परगना के बैरी मांझी ने अर्जुन मांझी और सोनाबाल परगना के सम्मन मांझी ने बलराम मांझी के नाम का प्रस्ताव रखा।
सदस्यों के मतदान के बाद बलराम मांझी को बस्तर दशहरा समिति का नया उपाध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया।
धार्मिक आयोजन से कहीं बढ़कर है बस्तर दशहरा
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पर्व की सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित रखते हुए व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जाना जरूरी है।
बैठक में 75 दिनों तक चलने वाले आयोजन के दौरान औपचारिक कार्यक्रमों को लेकर आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने, देवस्थलों में सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रमुख पूजा स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग तथा पक्की बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई।
UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का संकल्प
मांझी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने बताया कि बस्तर दशहरा वर्ष 1423 से लगातार मनाए जाने की परंपरा से जुड़ा है। इसकी ऐतिहासिकता, धार्मिक मान्यताओं और विशिष्ट जनजातीय परंपराओं को देखते हुए इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का साझा संकल्प लिया गया है।
यदि यह प्रयास आगे बढ़ता है तो बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
साफ-सफाई से लेकर पूजा स्थलों तक विशेष तैयारी
बैठक में दशहरा पर्व के प्रमुख मार्गों की विशेष साफ-सफाई, देवी-देवताओं के आगमन, पूजा स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा की गई।
मांझी-चालकी से पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी धारण करने का आग्रह किया गया। इसके साथ ही उनके मासिक मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव भी समिति के समक्ष रखा गया।
1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
बस्तर दशहरा 2026 के आयोजन के लिए बैठक में करीब 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया। इसके साथ ही पिछले वर्ष आयोजन पर हुए खर्च और उससे संबंधित जानकारी भी समिति के सदस्यों के सामने रखी गई।
समिति ने इस वर्ष आयोजन को बेहतर, व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न सुझावों पर चर्चा की।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी फोकस
नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष बलराम मांझी ने देवस्थलों, पूजा स्थलों और अन्य प्रमुख स्थानों पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के सुझाव दिए।
कलेक्टर आशुतोष छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने भी बस्तर दशहरा को गरिमापूर्ण, सुरक्षित और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचार साझा किए।
छात्राओं के लिए साइकिल योजना का भी उल्लेख
बैठक के दौरान बालिका शिक्षा से जुड़ी सरस्वती साइकिल योजना का भी उल्लेख किया गया। योजना के तहत हायर सेकेंडरी स्कूलों के साथ पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल वितरण की जानकारी दी गई।
सांसद महेश कश्यप ने कहा कि साइकिल मिलने से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में मदद मिलेगी।
वैश्विक पहचान की ओर बस्तर दशहरा
बस्तर दशहरा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामुदायिक भागीदारी और अनूठी परंपराएं हैं। यहां दशहरा सिर्फ किसी एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाली ऐसी सांस्कृतिक प्रक्रिया है जिसमें बस्तर के अलग-अलग समुदाय और पारंपरिक संस्थाएं अपनी भूमिका निभाते हैं।
इस बार आयोजन को भव्य बनाने के साथ-साथ बस्तर दशहरा की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में भी कदम बढ़ाने की तैयारी है। UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने का प्रयास सफल होता है तो यह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।
Author: Khabri Chai
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