जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के दावों के बीच गरियाबंद जिले के अमलीपदर तहसील से जालसाजी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बजाड़ी हल्का में सक्रिय एक शातिर ने जाली आधार कार्ड के सहारे ढाई एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री करा ली। हालांकि, ग्राम सरपंच की जागरूकता के चलते जमीन का नामांतरण होने से बच गया। अब इस पूरे मामले की जांच देवभोग उपपंजीयक कार्यालय के प्रभारी सहायक पंजीयक अजय चंद्रवंशी ने शुरू कर दी है।
39 साल का यूवक बना 80 साल पुराने जमीन का भूमि स्वामी
पूरा मामला अमलीपदर तहसील के बजाड़ी ग्राम में मौजूद खसरा नंबर 12 में मौजूद हरिसिंह के नाम के ढाई एकड़ कृषि भूमि का है, जिसकी बिक्री 15 अप्रैल 2025 को तत्कालीन सहायक पंजीयक चितेश देवांगन की मौजूदगी में उरमाल निवासी शांति लाल जैन को डेढ़ लाख रुपए में किया गया, लेकिन जब नामांतरण के लिए ग्राम पहुंचा तो विक्रेता का नाम देखकर सरपंच यशोदा नेताम ने नामांतरण में असहमति जता दिया।
प्रतिनिधि दुर्बल नेताम ने बताया कि विक्रेता का नाम जिस पते पर दिखाया गया वह नहीं रहता। गांव में उसे किसी ने देखा ही नहीं। ग्रामीण बताते हैं कि भमि 80 साल से गांव के जानकारी में पड़त थी, जिसे ग्राम देवी के सेवा करने वाले तुकाराम कुम्हार परिवार को दान में दिया गया था,अचानक से 39 साल के विक्रेता का नाम सुन यह खरीदी बिक्री चर्चा में आ गया।
पड़ोसी के आधार से किया गया छेड़छाड़
जब मामले की जमीनी पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रजिस्ट्री में भूमि स्वामी हरिसिंह नागेश (पिता लक्ष्मण) के नाम पर जिस आधार नंबर का उपयोग किया गया था, वह वास्तव में वार्ड क्रमांक 2 के निवासी हरिराम नागेश (पिता जयमल नागेश) का था। रजिस्ट्री के दौरान अपलोड की गई तस्वीर से साफ हुआ कि जमीन बेचने वाला असली शख्स आधार धारक का पड़ोसी भंवर लाल नागेश (पिता लखन नागेश) है। कड़ाई से पूछने पर भंवर लाल ने जमीन बेचना स्वीकार किया और सफाई दी कि उसका उपनाम (उर्फ) हरिसिंह है। उसने पिता के नाम में समानता का फायदा उठाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया और खरीदार से चेक लेकर ग्रामीण बैंक के खाते से पैसे भी निकाल लिए।
पत्नी ने पिता बताकर फौती दर्ज कराने की कोशिश किया
विक्रय अयोग्य भूमि को हथियाने की कूटरचना 2018 से रची गई, जिसे सरकारी जमीन अलाट था वह देवभोग तहसील के कैठपदर निवासी 70 वर्षीय हरिसिंह नागेश था, जिसकी मृत्यु मार्च 2018 में हो गई थी। भंवर के गिरोह की नजर जमीन पर शुरू से थी ऐसे में जमीन हथियाने भवर ने अपने पत्नी प्रभंजली से मार्च 2022 में फौती दर्ज कराने मैनपुर तहसील में आवेदन कराया। फर्जी आधार ने दर्ज बजाड़ी ग्राम के पते पर पत्नी ने हरिसिंह को अपना पिता बताते हुए नाम चढ़ाने की यह कोशिश भी इश्तहार जारी होने के बाद नाकाम हो गया।
नकल देने वाले पटवारी से लेकर दस्तावेज प्रस्तुत करता तक जांच के दायरे में
जाली आधार कार्ड से रजिस्ट्री ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। प्रभारी उपपंजीयक ने कहा कि प्रस्तुतकर्ता और गवाह के आधार पर रजिस्ट्री हो जाती थी क्योंकि आधार की ई कवासी का प्रावधान इस रजिस्ट्री के समय नहीं था, लेकिन फौती दर्ज कराने से लेकर रिकॉर्ड में नाम बदलने, जाली आधार कार्ड तैयार करने के अलावा रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज तैयार करने वाले सभी जांच के दायरे में है।प्रथम दृष्टया पूरा मामला कूट रचना का है।


Author: Khabri Chai
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