
पश्चिम बंगाल में I-PAC से जुड़े रेड मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसी के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में कर रही है।
इस पर ED ने पलटवार करते हुए कहा कि एजेंसी किसी के इशारे पर काम नहीं करती और पश्चिम बंगाल में छापेमारी के दौरान राज्य सरकार और पुलिस द्वारा उनके अधिकारियों को धमकाया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसका इस्तेमाल हथियार के रूप में हो रहा है और किसे धमकाया जा रहा है, यह तय करना अदालत का काम है।
दरअसल, ED ने I-PAC रेड मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC के कार्यालयों पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल पुलिस के अधिकारियों ने उनकी कार्रवाई में बाधा डाली। अदालत ने फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। इससे पहले भी 3 फरवरी को सुनवाई टाल दी गई थी। 15 जनवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी मुख्यमंत्री द्वारा ED की जांच में बाधा डालना गंभीर विषय है।

यह मामला I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी से जुड़े कथित ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है। I-PAC एक राजनीतिक परामर्श कंपनी है, जो विभिन्न दलों के चुनावी अभियानों की रणनीति तैयार करने का काम करती है। कंपनी और उसके निदेशक प्रतीक जैन पर कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े धन शोधन के आरोप लगे हैं। इस मामले में CBI ने 27 नवंबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी, जबकि ED ने 28 नवंबर 2020 से जांच शुरू की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, हवाला के जरिए लगभग ₹20 करोड़ की रकम I-PAC तक पहुंचने का आरोप है। इसी सिलसिले में 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में I-PAC के दफ्तरों और निदेशक के आवास पर छापेमारी की गई थी। छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अन्य नेताओं के साथ I-PAC कार्यालय पहुंचीं, जहां काफी हंगामा हुआ। आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कुछ फाइलें लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय एजेंसियों पर अत्यधिक दखलंदाजी का आरोप लगाया।

वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि I-PAC पार्टी के चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम करता है और विधानसभा चुनाव से पहले गोपनीय जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। राज्य सरकार ने ED की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोपों से इनकार किया है, जबकि पश्चिम बंगाल पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। राजनीतिक और कानूनी रूप से संवेदनशील इस मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।
Author: Khabri Chai
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