Kanker Cattle Accident: हाईवे पर बैठे 14 गोवंश को ट्रक ने कुचला, 12 की मौत; बदहाल कांजी हाउस पर उठे सवाल

कांकेर/लखनपुरी। छत्तीसगढ़ में सड़कों और हाईवे पर खुले में घूमने वाले मवेशी लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। कांकेर जिले में नेशनल हाईवे-30 पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर बैठे 14 गोवंश को कुचल दिया। हादसे में 12 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद ट्रक चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया।

हादसे ने एक बार फिर बेसहारा और आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने तथा उनके लिए सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईवे पर बैठे थे 14 मवेशी, ट्रक ने मारी टक्कर

घटना शनिवार रात करीब 11:30 बजे ग्राम कानापोड़ के पास हुई। जानकारी के मुताबिक जगदलपुर से रायपुर की ओर जा रहे ट्रक की चपेट में सड़क पर बैठे 14 मवेशी आ गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि 12 गोवंश की मौके पर ही मौत हो गई।

मृत पशुओं में नंदी और बछड़े भी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं दो मवेशी गंभीर रूप से घायल मिले। हादसे के बाद ट्रक चालक अंधेरे का फायदा उठाकर वाहन लेकर फरार हो गया।

स्थानीय लोगों और गौसेवकों ने संभाला मोर्चा

हादसे की जानकारी मिलते ही बजरंग दल के कार्यकर्ता, स्थानीय गौसेवक और चारामा पुलिस मौके पर पहुंचे। हाईवे पर पड़े मृत और घायल मवेशियों को हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराई गई।

घायल गोवंश को अस्थायी शेड में ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। वहीं हादसे में मारे गए 12 मवेशियों को अगले दिन ग्राम बाबूकोहका के पास दफनाया गया।

बजरंग दल की शिकायत पर चारामा थाने में फरार ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

चारामा के दोनों कांजी हाउस बदहाल होने का दावा

हादसे के बाद चारामा नगर पंचायत की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए दोनों कांजी हाउस लंबे समय से उपयोगी स्थिति में नहीं हैं।

पुराना कांजी हाउस जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होने की बात कही जा रही है। ऐसे में स्थानीय गौसेवक अपने स्तर पर अस्थायी शेड बनाकर घायल और बेसहारा मवेशियों की देखभाल कर रहे हैं।

सवाल यह है कि यदि मवेशियों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो उन्हें हाईवे और शहर की सड़कों से हटाने की जिम्मेदारी प्रभावी तरीके से कौन निभाएगा?

पहले भी सामने आ चुके हैं मवेशियों से जुड़े हादसे

चारामा क्षेत्र में मवेशियों के सड़क पर आने से हादसे का यह पहला मामला नहीं है। 29 अगस्त को कोरर मोड़ पर एक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से सात मवेशियों के कुचलने की घटना सामने आई थी। इसके अगले दिन यानी 30 अगस्त को पेट्रोल पंप के सामने एक गाय की मौत होने की जानकारी सामने आई।

लगातार घटनाओं के बावजूद सड़क से मवेशियों को हटाने और उनके लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

कांकेर शहर में भी सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा

कांकेर शहर में भी कई प्रमुख सड़कों और चौक-चौराहों पर मवेशियों के झुंड दिखाई देने की बात सामने आई है। ज्ञानी चौक, नया बस स्टैंड, मुख्य डाकघर, दूधनदी पुल, मस्जिद चौक और घड़ी चौक जैसे क्षेत्रों में अक्सर बड़ी संख्या में गोवंश सड़क पर बैठे नजर आते हैं।

वहीं बरदेभाठा स्कूल से ज्ञानी चौक के बीच 100 से अधिक मवेशियों के सड़क घेरकर खड़े रहने का दावा किया गया है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

साजा में गौवंश की मौत को लेकर भी आरोप

साजा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गाड़ाभाठा में भी गौवंश की लगातार मौत को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि गौठान में पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिलने के कारण मवेशी भूख, बीमारी और कमजोरी की वजह से दम तोड़ रहे हैं।

मृत पशुओं के शव नदी किनारे और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर फेंके जाने की बात भी सामने आई है। मामले में तहसीलदार साजा विनोद बंजारे ने रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को सौंप दी है। एसडीएम कृष्ण कुमार साहू ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है, हालांकि उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का अभी परीक्षण नहीं किया गया है।

टैगिंग के बावजूद बिना टैग घूम रहे मवेशियों पर सवाल

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर क्षेत्र में पशुओं की टैगिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में पशुओं की टैगिंग किए जाने का रिकॉर्ड मौजूद है। टैगिंग के लिए प्रति पशु करीब तीन रुपये का प्रावधान बताया गया है और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करीब 18 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।

इसके बावजूद सड़कों पर ऐसे कई मवेशी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, जिनके कान में टैग नहीं है। कुछ मामलों में ऑनलाइन रिकॉर्ड में पशुओं की टैगिंग दर्ज है, लेकिन मौके पर उनके कान में टैग नहीं मिला।

रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर ने बढ़ाई चिंता

पशुओं की टैगिंग का उद्देश्य उनकी पहचान और स्वामित्व का पता लगाना है। ऐसे में रिकॉर्ड में टैगिंग पूरी होने के बावजूद यदि मौके पर बिना टैग वाले मवेशी मिलते हैं, तो निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कांकेर का ताजा हादसा, चारामा के कांजी हाउस की बदहाल स्थिति, साजा में गौवंश की मौत के आरोप और टैगिंग को लेकर सामने आई विसंगतियां—ये सभी मवेशियों के संरक्षण और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

सड़क पर खुले में मवेशियों को छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही नगर निकायों और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को भी प्रभावी बनाना जरूरी है, ताकि हाईवे और शहर की सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके।

Khabri Chai
Author: Khabri Chai

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