अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। इसके साथ ही ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन को दोनों के कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इसकी पुष्टि की।
सूत्रों के अनुसार, कृष्ण मोहन फिलहाल चंपत राय की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अनिल मिश्रा के कार्यों का भी दायित्व संभालेंगे। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी, जिसमें खाली हुए ट्रस्टी पदों पर नियुक्तियों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लिया जाएगा।
कौन हैं कृष्ण मोहन?
कृष्ण मोहन प्रशासनिक सेवा और संगठनात्मक कार्यों का लंबा अनुभव रखते हैं। उन्होंने वर्ष 1970 में लखनऊ विश्वविद्यालय से जियोलॉजी में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे भारतीय वन सेवा (IFS) के महाराष्ट्र कैडर में शामिल हुए।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) और कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद वे अपने गृह जनपद हरदोई लौट आए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सक्रिय रूप से जुड़ गए। संघ में उन्होंने नगर संघचालक, जिला संघचालक और अवध प्रांत के प्रांत संघचालक जैसे अहम दायित्व निभाए।

ट्रस्ट में कैसे हुई एंट्री?
राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को सदस्य बनाया था। ट्रस्ट का मानना था कि उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से मंदिर प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। इसी अनुभव को देखते हुए अब उन्हें ट्रस्ट के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों में से एक सौंपा गया है।
चंदा गबन मामले के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर चंदा गबन मामले में भी कृष्ण मोहन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनकी शिकायत के आधार पर अयोध्या पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर दर्ज इस मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई और सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच के लिए सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई हुई। इसी पूरे घटनाक्रम के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया।
बताया जा रहा है कि इस कथित चंदा गबन मामले में 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग की जांच की जा रही है। हालांकि, इस राशि और आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
क्यों अहम है महासचिव का पद?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) का पद सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में माना जाता है। इस पद पर रहने वाला व्यक्ति ट्रस्ट की बैठकों का संचालन, विभिन्न समितियों के बीच समन्वय, ट्रस्ट के फैसलों को लागू कराने, मंदिर निर्माण और प्रबंधन से जुड़े कार्यों की निगरानी तथा प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने का दायित्व निभाता है।
चंपत राय लंबे समय तक इस पद पर रहे और राम मंदिर निर्माण से जुड़े अधिकांश प्रशासनिक निर्णयों में उनकी अहम भूमिका रही।
22 जुलाई की बैठक पर सबकी नजर
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में तीन ट्रस्टी पद रिक्त हो गए हैं। इन पदों पर नए सदस्यों के चयन के लिए 22 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक बुलाई गई है।
बैठक में नए ट्रस्टियों के नामों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। साथ ही, चंदा गबन मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट और उससे जुड़े आगे के कदमों पर भी चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल, ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन की पूरी जिम्मेदारी कृष्ण मोहन के कंधों पर आ गई है, जिससे उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
Author: Khabri Chai
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