इंद्रावती नदी की बाढ़ पर छत्तीसगढ़-ओडिशा आमने-सामने, 10 टीएमसी पानी छोड़ने पर विवाद; भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 गेट खुले

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में इंद्रावती नदी में आई भीषण बाढ़ को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद गहरा गया है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में नदी का जलस्तर बढ़ने और बड़े पैमाने पर पानी बहने के बाद दोनों राज्यों के अधिकारी बाढ़ के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से करीब 10 टीएमसी पानी छोड़े जाने को बाढ़ की प्रमुख वजहों में शामिल बताया गया, जबकि ओडिशा ने नगरनार के पास स्थित भालूगुड़ा एनीकट पर सवाल उठाए। अब संभावित चक्रवाती बारिश और दोबारा बाढ़ के खतरे को देखते हुए दोनों राज्यों ने समन्वय से काम करने पर सहमति जताई है।

Water level of Indravati river rising from 3 to 4 cm daily incessantly due  to flood in Bastar

10 टीएमसी पानी छोड़ने पर उठे सवाल

सितंबर के अंतिम सप्ताह में बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, जगदलपुर में नदी का जलस्तर 12.390 मीटर तक पहुंच गया था। इस दौरान पुराने पुल के पास से 23 से 26 सितंबर के बीच करीब 40 टीएमसी पानी बहने का उल्लेख किया गया है।

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के मुताबिक, इस पानी का बड़ा हिस्सा ओडिशा की ओर से आया था और खातीगुड़ा बांध से 10 टीएमसी से अधिक पानी छोड़े जाने की बात भी सामने आई। राज्य की ओर से भारी बारिश के साथ बांध से पानी छोड़े जाने को बाढ़ के प्रमुख कारणों में गिनाया गया। हालांकि, बाढ़ में अलग-अलग कारकों की भूमिका और बांध से छोड़े गए पानी के वास्तविक प्रभाव का आकलन तकनीकी तथ्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

भालूगुड़ा एनीकट को लेकर दोनों राज्यों में टकराव

ओडिशा ने इंद्रावती नदी पर नगरनार के समीप स्थित भालूगुड़ा एनीकट को बाढ़ की वजह बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। यह एनीकट करीब डेढ़ मीटर ऊंचा बताया गया है। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि एनीकट की ऊंचाई और उसकी संरचना को देखते हुए उसे इतनी बड़ी बाढ़ का मुख्य कारण बताना उचित नहीं है।

एक अक्टूबर को ओडिशा के जल संसाधन विभाग की टीम ने भालूगुड़ा एनीकट का निरीक्षण किया था। इस दौरान दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। इसके बाद भी एनीकट को लेकर विवाद खत्म नहीं हुआ और ओडिशा की ओर से इस पर सवाल उठाए जाते रहे।

रविवार को अपर कोलाब डिवीजन, बारनीपुट के अतिरिक्त मुख्य अभियंता हेमंतो दास के नेतृत्व में ओडिशा की टीम ने दोबारा एनीकट का निरीक्षण किया। संयुक्त निरीक्षण में बस्तर जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री भरत सिंह, सहायक यंत्री निर्मल पानीग्राही और नगरनार स्टील प्लांट के अधिशासी निदेशक प्रमोद कुमार सिंह भी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग और एनएमडीसी के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कहा कि डेढ़ मीटर ऊंचे एनीकट के कारण इतनी बड़ी बाढ़ आने का दावा सही नहीं है। इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच आगे भी चर्चा जारी रहने की बात कही गई है।

संभावित चक्रवाती बारिश से पहले भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 गेट खोले

इंद्रावती नदी में दोबारा बाढ़ की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग ने भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार खोल दिए हैं। यह कदम 27 और 28 अक्टूबर को संभावित भारी बारिश तथा बाढ़ के खतरे को देखते हुए उठाया गया है। बताया गया है कि ओडिशा के जल संसाधन विभाग के आग्रह और एनएमडीसी के समन्वय से एनीकट के गेट खोले गए हैं।

दूसरी ओर, ओडिशा की ओर से भी खातीगुड़ा बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य संभावित बारिश के दौरान जलस्तर को नियंत्रित रखने और बाढ़ के खतरे को कम करने की तैयारी बताया गया है।

दोनों राज्यों के बीच हुई चर्चाओं में यह सहमति बनी है कि बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति में छत्तीसगढ़ को पहले से सूचना दी जाएगी, ताकि निचले इलाकों में समय रहते सतर्कता बरती जा सके।

नवरंगपुर कलेक्टर की बैठक में भी उठा मुद्दा

इंद्रावती नदी में आई बाढ़ और दोनों राज्यों के बीच विवाद को लेकर नवरंगपुर की कलेक्टर अन्या दास ने 23 अक्टूबर को संबंधित परियोजनाओं के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। इसमें अपर इंद्रावती परियोजना, अपर कोलाब डिवीजन और इंद्रावती परियोजना मंडल, जगदलपुर के अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की।

25 अक्टूबर की शाम हुई एक अन्य वर्चुअल बैठक में बस्तर की ओर से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तन्मय खन्ना और इंद्रावती परियोजना मंडल के अधीक्षण यंत्री वेदप्रकाश पांडे शामिल हुए।

बैठक में भालूगुड़ा एनीकट को लेकर छत्तीसगढ़ का पक्ष दोहराया गया। साथ ही संभावित भारी बारिश को देखते हुए दोनों राज्यों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और आपदा प्रबंधन के लिए आपसी समन्वय मजबूत करने पर सहमति बनी।

बस्तर प्रशासन अलर्ट, 24 घंटे सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम

संभावित चक्रवाती बारिश और मौसम विभाग की ओर से बस्तर संभाग के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर आकाश छिकारा ने 27 अक्टूबर से भारी बारिश की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

जिला और तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। राजस्व, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य और विद्युत विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। निचले और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है।

राज्य आपदा मोचन दल और होमगार्ड को भी नावों तथा आवश्यक बचाव उपकरणों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव अभियान चलाया जा सके।

अब विवाद से ज्यादा जरूरी बाढ़ से बचाव

इंद्रावती नदी में सितंबर में आई बाढ़ के लिए कौन-सा कारण कितना जिम्मेदार था, यह विवाद अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। एक ओर छत्तीसगढ़ खातीगुड़ा बांध से छोड़े गए पानी और भारी बारिश को महत्वपूर्ण कारण बता रहा है, तो दूसरी ओर ओडिशा ने भालूगुड़ा एनीकट पर सवाल उठाए हैं।

फिलहाल दोनों राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संभावित भारी बारिश के दौरान बाढ़ के खतरे को कम करना है। बांध से पानी छोड़ने की पूर्व सूचना, नदी के जलस्तर की निगरानी और समय पर प्रशासनिक समन्वय से ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। विवाद के तकनीकी निष्कर्ष सामने आने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए दोनों राज्य स्थायी समन्वय व्यवस्था विकसित करें।

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Author: Khabri Chai

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