कवर्धा। छत्तीसगढ़ में धान का उचित मूल्य, गन्ने के बोनस में बढ़ोतरी और बकाया राशि के भुगतान की मांग को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। भारतीय किसान संघ ने गुरुवार को कवर्धा में बलराम किसान न्याय यात्रा निकालकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में जिलेभर से हजारों किसानों के शामिल होने का दावा किया गया। किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर शहर के सात प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम कर दिया, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई और कई जगह वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा। आंदोलन के दौरान बसों और दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई यात्रियों को बीच रास्ते में उतरकर पैदल सफर करना पड़ा।
सात प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम, बसों की आवाजाही प्रभावित
किसानों ने नेशनल हाईवे-30 के रायपुर मार्ग सहित जोराताल, न्यू पुलिस लाइन, राजनांदगांव रोड, समनापुर रोड, न्यू बस स्टैंड और खुंटू नर्सरी रोड पर प्रदर्शन किया। इन मार्गों पर चक्काजाम होने से शहर में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
न्यू बस स्टैंड पर 50 से अधिक बसें खड़ी रहीं। चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद कुछ बस संचालकों ने रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव जाने वाली बसों को बैरियर के बाहर ही रोक दिया। हालांकि, किसानों ने आपातकालीन सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सड़क पर करीब 10 फीट जगह खाली रखने की बात कही, ताकि एंबुलेंस सहित जरूरी सेवाओं की आवाजाही बाधित न हो।
धान की कीमत 3358 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
किसानों की प्रमुख मांग धान की खरीदी 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने की है। भारतीय किसान संघ का कहना है कि खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।
किसान संगठन ने सरकार से धान के मूल्य निर्धारण पर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि किसानों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए मूल्य और भुगतान से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
गन्ने के बोनस में 150 रुपये की बढ़ोतरी की मांग
धान के साथ गन्ने का बोनस भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा रहा। किसानों ने गन्ने के बोनस में 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करने और बकाया राशि का भुगतान करने की मांग उठाई है।
प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में राज्य सरकार की ओर से गन्ना किसानों को करीब 93 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाता था। वहीं, वर्तमान व्यवस्था में राज्य सरकार की हिस्सेदारी 26 रुपये प्रति क्विंटल बताई गई है।
गन्ने का कुल उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 355 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है, जिसमें 329 रुपये कारखाने की ओर से और 26 रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाने की जानकारी दी गई है। किसानों का कहना है कि बोनस की राशि में पहले की तुलना में कमी आने से उनकी आय प्रभावित हो रही है। हालांकि, इन दरों और भुगतान व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
मांगों पर फैसला होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने कहा कि धान का उचित मूल्य और गन्ने के बोनस में बढ़ोतरी किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर पूरी तैयारी के साथ आंदोलन किया है और मांगों पर निर्णय होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
वहीं, कवर्धा के एसडीएम चेतन साहू के मुताबिक, किसान संगठन के प्रतिनिधियों से बातचीत की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें प्रदेश स्तर की नीतियों से जुड़ी हैं, इसलिए इन पर अंतिम फैसला जिला प्रशासन के स्तर पर नहीं लिया जा सकता। निर्णय शासन स्तर पर होना है।
बिलासपुर में भी निकाली गई बलराम किसान न्याय यात्रा
किसानों की मांगों को लेकर बिलासपुर में भी भारतीय किसान संघ ने प्रदर्शन किया। किसानों ने नेहरू चौक पर धरना दिया और इसके बाद बलराम किसान न्याय यात्रा निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
किसानों ने चौथी किस्त के 1975 करोड़ रुपये का भुगतान करने, धान का मूल्य 3358 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याओं का समाधान करने की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष माधो सिंह ठाकुर ने कहा कि किसान अपनी मेहनत से राज्य के अन्न भंडार को भरते हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य और दूसरे अधिकारों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
खाद, सिंचाई और फसल नुकसान का मुद्दा भी उठा
बिलासपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान किसानों ने खाद की उपलब्धता, धान खरीदी में अतिरिक्त तौल, सिंचाई की समस्या और प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को हुए नुकसान जैसे मुद्दे भी उठाए।
किसान संगठन का दावा है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए गए। इससे स्पष्ट है कि किसानों की मांगें केवल धान की कीमत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गन्ने का बोनस, लंबित भुगतान, कृषि लागत और सिंचाई जैसी समस्याएं भी उनके विरोध का हिस्सा हैं।
अब शासन के फैसले पर किसानों की नजर
कवर्धा और बिलासपुर में हुए प्रदर्शनों के बाद अब किसानों की नजर शासन की प्रतिक्रिया पर है। भारतीय किसान संघ ने धान का मूल्य 3358 रुपये प्रति क्विंटल करने, गन्ने के बोनस में बढ़ोतरी और लंबित भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इन मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है और किसानों को राहत देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
Author: Khabri Chai
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