छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग द्वारा प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने के फैसले के बाद प्रदेशभर में सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो गई है। बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किए गए इस निर्णय के कारण बीते 15 दिनों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की बिक्री से करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। प्रदेश की करीब 800 शराब दुकानों में मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हालात यह हैं कि दुकानों को खपत का केवल एक-तिहाई स्टॉक मिल रहा है, जो कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है। बिलासपुर समेत कई जिलों में शाम होते-होते दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं।

1 अप्रैल से पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग का आदेश जारी होने के बाद डिस्टिलर्स और बॉटलर्स में हड़कंप मच गया। कांच की बोतलों में बॉटलिंग करने वाले कुछ पक्ष कोर्ट चले गए, वहीं अचानक बड़े पैमाने पर प्लास्टिक बोतलों की उपलब्धता भी चुनौती बन गई।नई व्यवस्था के चलते डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन और बॉटलिंग पूरी तरह ठप रही। इस दौरान दुकानों का पुराना स्टॉक खत्म हो गया। 10 अप्रैल से उत्पादन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति अभी भी काफी कम है।
Author: Khabri Chai
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