Punjab और देश के कुछ अन्य सीमावर्ती इलाकों में पुरुषों की कम उम्र में हो रही मौतों ने गंभीर सामाजिक चिंता पैदा कर दी है। कई गांवों में बड़ी संख्या में महिलाएं कम उम्र में ही विधवा हो रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में हालात इतने गंभीर हैं कि वहां बड़ी संख्या में घरों में केवल महिलाएं और बुजुर्ग ही नजर आते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे नशे की लत, जहरीले पदार्थों का सेवन, खराब जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में ड्रग्स और सिंथेटिक नशे के बढ़ते इस्तेमाल ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
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स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि कई परिवारों में कमाने वाले पुरुषों की असमय मौत के बाद महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आय और सामाजिक सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।डॉक्टरों का कहना है कि लगातार नशे का सेवन शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा असर डालता है, जिससे हार्ट अटैक, लिवर डैमेज और मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में ओवरडोज भी मौत की वजह बन रही है।सरकार और प्रशासन की ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कार्रवाई नहीं बल्कि जागरूकता, पुनर्वास और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
Author: Khabri Chai
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