जेवर। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक डबल डेकर स्लीपर बस में भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। जेवर के पास एयरपोर्ट इंटरचेंज से करीब 35 किलोमीटर दूर हुए हादसे में बस के अंदर फंसे 9 यात्रियों की मौत हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका।
हादसे के बाद करीब पांच घंटे तक राहत और बचाव अभियान चलाया गया। आग बुझने के बाद पुलिस, दमकल विभाग और एक्सप्रेसवे की सुरक्षा टीमों ने बस की बॉडी को अलग-अलग हिस्सों से काटकर अंदर फंसे यात्रियों के शवों को बाहर निकाला। शवों को कैलाश अस्पताल भेजा गया है।
इंजन से शुरू हुई आग, देखते ही देखते पूरी बस चपेट में
जानकारी के अनुसार राज कल्पना ट्रेवल्स की डबल डेकर स्लीपर बस दिल्ली से मोहबा की ओर जा रही थी। एयरपोर्ट इंटरचेंज के पास चालक को बस के इंजन की तरफ आग दिखाई दी। इसके बाद चालक ने बस को ओवरटेकिंग लेन से हटाकर एक्सप्रेसवे के किनारे सोल्डर पर खड़ा किया।
चालक और परिचालक ने यात्रियों को बस से बाहर निकलने के लिए आवाज लगाई। आग और धुएं के बीच यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि 20 से अधिक यात्री किसी तरह बस से बाहर निकलकर सुरक्षित बच गए, जबकि कुछ यात्री अंदर ही फंस गए।
कुछ ही देर में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। तेज लपटों और घने धुएं के कारण बस के अंदर फंसे यात्रियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।
पांच घंटे चला रेस्क्यू, बस की बॉडी काटकर निकाले शव
दमकल की टीमों ने आग पर काबू पाने के बाद बस के अंदर फंसे यात्रियों को निकालने का अभियान शुरू किया। बस की बॉडी कई हिस्सों से काटी गई, जिसके बाद रेस्क्यू टीम अंदर पहुंच सकी।
करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद अंदर फंसे शवों को बाहर निकाला गया। आग की तीव्रता के कारण शवों की स्थिति बेहद खराब थी, जिसके चलते मौके पर उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
टिकट बुकिंग से होगी मृतकों की पहचान
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान करना है। शवों की स्थिति को देखते हुए पुलिस अब बस की टिकट बुकिंग और यात्रियों का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
इसी रिकॉर्ड के आधार पर संभावित मृतकों के परिजनों से संपर्क किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से परिजनों के डीएनए नमूने लिए जाने और शवों से प्राप्त नमूनों के साथ उनका मिलान कराने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। डीएनए जांच के बाद ही मृतकों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि संभव होगी।
करीब 30 मिनट प्रभावित रहा एक्सप्रेसवे का यातायात
हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से जेवर टोल और एयरपोर्ट इंटरचेंज के आसपास करीब 30 मिनट तक यातायात को रोका गया। इससे यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
इसी दौरान दो कारों के आपस में टकराने की भी जानकारी सामने आई। राहत और बचाव अभियान पूरा होने तथा घटनास्थल को सुरक्षित किए जाने के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात फिर से सामान्य किया गया।
सुरक्षित यात्रियों को कराया गया प्राथमिक उपचार
हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस, दमकल और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया गया।
उपजिलाधिकारी जेवर ने सुरक्षित बचे यात्रियों को जेवर टोल पर प्राथमिक उपचार दिलाया। इसके बाद प्रशासन की ओर से उनके आगे के सफर की व्यवस्था की गई। यात्रियों को टेंपो ट्रेवलर के जरिए उनके गंतव्य की ओर रवाना किया गया।
पटाखे जैसी आवाजें सुनाई देने से बढ़ी जांच
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के दौरान बस से पटाखे जैसी तेज आवाजें भी सुनाई दीं। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस और संबंधित विभाग यह जांच कर रहे हैं कि आग इंजन में किस कारण लगी और किस वजह से इतनी तेजी से पूरी बस में फैल गई। बस के तकनीकी सिस्टम, अग्निशमन उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जा सकती है।
स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि बस में पर्याप्त अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, आपात स्थिति में यात्रियों के बाहर निकलने के रास्ते कितने सुरक्षित थे और आग लगने के बाद बचाव की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही।
फिलहाल पुलिस-प्रशासन की प्राथमिकता मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों को सूचना देना और हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किस वजह से लगी और हादसे के लिए कोई लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।
Author: Khabri Chai
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