भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से एक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो के सह-संस्थापक आदित पालिचा जल्द ही देश की किसी सूचीबद्ध कंपनी के सबसे युवा मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ बन सकते हैं। कंपनी इस वर्ष शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है और इसके लिए सेबी के पास आईपीओ से जुड़े नए दस्तावेज जमा किए गए हैं।
10 मिनट डिलीवरी के आइडिया ने बदल दी बाजार की तस्वीर
आदित पालिचा और उनके मित्र कैवल्य वोहरा ने कोविड काल के दौरान अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच में छोड़कर उद्यमिता की राह चुनी। वर्ष 2021 में दोनों ने जेप्टो की शुरुआत की और 10 मिनट में किराना डिलीवरी का मॉडल पेश किया। उस समय कई विशेषज्ञों ने इस मॉडल को अव्यावहारिक बताया था, लेकिन आज यही मॉडल भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर का सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है।
10 हजार करोड़ रुपये तक का हो सकता है आईपीओ
बाजार सूत्रों के अनुसार, जेप्टो का प्रस्तावित आईपीओ 8 हजार से 10 हजार करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। लिस्टिंग के बाद आदित पालिचा देश के सबसे युवा सूचीबद्ध कंपनी प्रमुखों में शामिल हो जाएंगे।
फेल स्टार्टअप से मिली सफलता की सीख
जेप्टो की सफलता के पीछे कई असफलताओं का अनुभव भी छिपा है। भारत लौटने के बाद आदित और कैवल्य ने सबसे पहले ‘किरानाकार्ट’ नाम का एप शुरू किया था। यह स्थानीय किराना दुकानों पर आधारित मॉडल था, लेकिन उत्पाद उपलब्धता और डिलीवरी समय जैसी समस्याओं के कारण यह सफल नहीं हो पाया।
इसी असफलता ने दोनों युवा उद्यमियों को यह समझाया कि मजबूत सप्लाई चेन और डार्क स्टोर नेटवर्क के बिना तेज डिलीवरी संभव नहीं है। बाद में इसी अनुभव ने जेप्टो की मजबूत नींव तैयार की।
ट्रैफिक जाम में आया था पहला स्टार्टअप आइडिया
उद्यमिता की शुरुआत भी एक दिलचस्प घटना से हुई। वर्ष 2019 में दुबई में ट्रैफिक जाम में फंसने के दौरान आदित के छोटे भाई ईशान ने सुझाव दिया कि यदि माता-पिता कार शेयर करें तो सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो सकती है। इसी विचार से प्रेरित होकर आदित ने ‘गो-पूल’ नाम का कारपूलिंग एप विकसित किया, जिसे शुरुआती स्तर पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली।
तेजी से बढ़ा जेप्टो का कारोबार
जेप्टो ने पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक कंपनी के डार्क स्टोर्स की संख्या बढ़कर 1,139 हो चुकी है, जबकि दो वर्ष पहले यह आंकड़ा केवल 337 था। कंपनी अब 66 शहरों में अपनी सेवाएं दे रही है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में कंपनी ने करीब 21 करोड़ ऑर्डर प्रोसेस किए।
संस्थापकों को मिला करोड़ों का वेतन
वित्त वर्ष 2025-26 में आदित पालिचा को 2.74 करोड़ रुपये और कैवल्य वोहरा को 2.61 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला। हालांकि आईपीओ के दौरान दोनों संस्थापक अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना नहीं बना रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें कंपनी के भविष्य पर पूरा भरोसा है।
युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा बनी जेप्टो की कहानी
महज कुछ वर्षों में एक असफल प्रयोग से देश की सबसे चर्चित क्विक कॉमर्स कंपनियों में जगह बनाना आसान नहीं था। आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा की यात्रा यह दिखाती है कि सही सोच, जोखिम उठाने का साहस और लगातार सीखने की क्षमता किसी भी विचार को बड़े व्यवसाय में बदल सकती है। आज जेप्टो केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि भारत के युवा स्टार्टअप उद्यमियों के लिए सफलता की नई मिसाल बन चुकी है।
Author: Khabri Chai
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