डोंगरगढ़ में शांतिपूर्वक संपन्न हुई पंचमी भेंट, बस्तर से पहुंचे 15 आंगादेव; मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग बनी आकर्षण

डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी मंदिर की पंचमी भेंट इस बार आस्था, आदिवासी संस्कृति और आपसी भाईचारे की मिसाल बनकर सामने आई। 16 अक्टूबर 2026 को बस्तर से पहुंचे 15 आंगादेव और पारंपरिक डांग के साथ गोंड समाज ने विधि-विधान से पंचमी भेंट की रस्म पूरी की। इस बार मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग भी तैयार की गई, जो आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही।

पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच इस बार कार्यक्रम का शांतिपूर्वक संपन्न होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खैरागढ़ राजपरिवार, गोंड समाज और मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के बीच आपसी सहमति और प्रशासन के समन्वय से आयोजन बिना किसी विवाद के पूरा हुआ।

लाल निवास से शुरू हुई पूजा-अर्चना

पंचमी भेंट कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर करीब तीन बजे खैरागढ़ राजपरिवार के डोंगरगढ़ स्थित राजमहल लाल निवास से हुई। यहां आदिवासी समाज ने अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की। इसके बाद शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थित देवी-देवताओं के स्थलों पर पहुंचकर धार्मिक रस्में निभाई गईं।

बस्तर से आए आंगादेव का स्वागत भी किया गया। पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ निकली इस यात्रा ने डोंगरगढ़ में धार्मिक उत्सव का माहौल बना दिया। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने भी इस पारंपरिक आयोजन को देखा।

बूढ़ादेव गुफा से मां बम्लेश्वरी मंदिर तक पहुंची यात्रा

पंचमी भेंट यात्रा छीरपानी स्थित प्राचीन बूढ़ादेव गुफा पहुंची, जहां पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद यात्रा मेला ग्राउंड से होते हुए नीचे स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर परिसर पहुंची। यहां मंदिर ट्रस्ट समिति ने यात्रा का स्वागत किया।

बस्तर से 15 आंगादेव का आगमन और मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग की उपस्थिति इस बार आयोजन की खास विशेषताएं रहीं। गोंड समाज के लिए पंचमी भेंट केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।

मंदिर ट्रस्ट ने किया पारंपरिक यात्रा का स्वागत

मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे आदिवासी समाज के लोगों की यात्रा का सभी ने उत्साह के साथ स्वागत किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से आयोजन की रौनक बढ़ी।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े पारंपरिक आयोजनों का स्वागत किया जाता रहा है और आगे भी यह परंपरा जारी रहेगी। ऐसे कार्यक्रम समाज की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाने के साथ लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर देते हैं।

राजपरिवार ने सभी पक्षों के सहयोग को सराहा

खैरागढ़ राजपरिवार के राजकुमार भवानी बहादुर सिंह ने आयोजन को सफल बनाने में गोंड समाज, मंदिर ट्रस्ट समिति और जिला प्रशासन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी समाजों को साथ लेकर चलना और आपसी बातचीत से मतभेद दूर करना जरूरी है।

उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, ट्रस्ट के सदस्यों, गोंड समाज और संतोष पडोती के सहयोग के लिए आभार जताया। उनके अनुसार, मां के दरबार में सभी समान हैं और समाज को भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि धार्मिक परंपराओं का निर्वहन आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग के साथ किया जा सकता है।

प्रशासन और पुलिस की निगरानी में हुआ आयोजन

पंचमी भेंट यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने पहले से तैयारी की थी। राजपरिवार, गोंड समाज और मंदिर ट्रस्ट समिति के प्रतिनिधियों के बीच समन्वय स्थापित कर सहमति बनाई गई थी।

राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने बताया कि प्रशासन और पुलिस ने आयोजन को लेकर आवश्यक तैयारियां की थीं। सभी पक्षों के सहयोग से पूजा शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।

विवादों के बीच सहमति की नई मिसाल

पिछले आयोजनों में पूजा पद्धति, गर्भगृह में प्रवेश और अलग-अलग पक्षों की भूमिका को लेकर मतभेद सामने आए थे। ऐसे में इस बार कार्यक्रम से पहले बातचीत के माध्यम से सहमति बनाना और आयोजन के दौरान सहयोग बनाए रखना महत्वपूर्ण रहा।

बस्तर से आए 15 आंगादेव, मां बम्लेश्वरी के नाम की नई डांग, राजपरिवार की भागीदारी और मंदिर ट्रस्ट के स्वागत ने पंचमी भेंट को विशेष स्वरूप दिया।

कुल मिलाकर, डोंगरगढ़ की पंचमी भेंट ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और संवाद का संदेश दिया। अब चुनौती इस सहमति को भविष्य के आयोजनों में भी बनाए रखने की है, ताकि परंपराओं का सम्मान करते हुए सभी पक्ष मिल-जुलकर धार्मिक कार्यक्रमों का निर्वहन कर सकें।

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Author: Khabri Chai

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