
रायपुर, 28 जनवरी 2026: रायपुर में सरकारी रसोइयों की हड़ताल ने एक दुखद मोड़ ले लिया है। हड़ताल के दौरान दो महिलाओं की मौत हो गई, जिनका इलाज दुर्ग और बालोद के अस्पतालों में चल रहा था। मृतक महिलाएं पिछले 30 दिनों से मानदेय और परमानेंट पद की मांग को लेकर धरने पर बैठी हुई थीं।
सूत्रों के अनुसार, महिलाएं कई हफ्तों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थीं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार मुलाकात की, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच, लगातार भूख हड़ताल और धरने के कारण महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर पड़ा।
दोनों महिलाओं को तुरंत दुर्ग और बालोद के अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाने में असमर्थता जताई। यह घटना पूरे राज्य में रसोइयों और सरकारी कर्मचारियों के बीच चिंता का विषय बन गई है।

स्थानीय यूनियनों और महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि हड़ताल और धरना उनके लिए आखिरी विकल्प था। उनका कहना है कि वे लंबे समय से स्थायी मानदेय, परमानेंट पद और उचित कामकाजी परिस्थितियों की मांग कर रही थीं।
राज्य सरकार ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने और अन्य रसोइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह की हड़तालों से बचने के लिए संवाद और नीतिगत सुधार जरूरी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल कर्मचारी कल्याण की गंभीर कमी को नहीं दिखातीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़ा करती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भूख हड़ताल जैसी चरम स्थिति से बचने के लिए प्रारंभिक संवाद और उपाय लागू करने की आवश्यकता है।
यह दुखद घटना पूरे छत्तीसगढ़ में हड़ताल और अधिकारों के मुद्दे को लेकर बहस का विषय बन गई है। राज्य सरकार और प्रशासन को इस मामले में तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो।
Author: Khabri Chai
Khabri Chai news portal.





