India की मुद्रा रुपया लगातार दबाव में नजर आ रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये ने एक बार फिर रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया है, जिससे बाजार और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञ अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या आने वाले समय में डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के स्तर तक पहुंच सकता है।हाल ही में Narendra Modi ने देशवासियों से ‘वोकल फॉर लोकल’ और घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की थी, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। लेकिन इसके बावजूद वैश्विक आर्थिक दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश की निकासी के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
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अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और बढ़ता व्यापार घाटा भी रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह हैं। डॉलर मजबूत होने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।विशेषज्ञों के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार नहीं हुआ और विदेशी निवेश में गिरावट जारी रही, तो रुपये पर और दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत घरेलू मांग और रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।रुपये की गिरावट को लेकर अब आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक में चिंता का माहौल है, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है।
Author: Khabri Chai
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