रायपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी की लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार को गंभीर मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 1 करोड़ 8 लाख 71 हजार रुपये का भुगतान 45 दिनों के भीतर करे। निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं करने पर कंपनी को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत केंड्रे और सदस्य डॉ. आनंद वर्मा की पीठ ने यह आदेश सुनाते हुए माना कि बीमा कंपनी ने बिना पर्याप्त आधार के क्लेम को लंबित रखा और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार किया।
मामला रायपुर के प्रियदर्शिनी नगर निवासी ठेकेदार धर्मेंद्र द्विवेदी से जुड़ा है। उन्होंने अपनी दो पोकलेन मशीनों—एक जेसीबी और एक टाटा हिताची—का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। दोनों मशीनों की कुल बीमित राशि 1 करोड़ 3 लाख 51 हजार रुपये थी।
जानकारी के अनुसार, अगस्त 2023 में नवा रायपुर के राखी थाना क्षेत्र के तांदुल गांव के पास खराब होने के कारण दोनों मशीनों को सड़क किनारे खड़ा किया गया था। दो दिन बाद जब ठेकेदार मरम्मत के लिए पहुंचे तो दोनों मशीनें वहां से गायब थीं। घटना की सूचना तत्काल पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई।

हालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम मंजूर करने से इनकार कर दिया कि केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा (क्लोजर) रिपोर्ट के आधार पर चोरी सिद्ध नहीं होती। कंपनी का तर्क था कि जब तक मशीनें या आरोपी बरामद नहीं हो जाते, तब तक चोरी साबित नहीं मानी जा सकती।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीमा कंपनी के इस तर्क को खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि पुलिस जांच के बावजूद मशीनें और आरोपी नहीं मिले, लेकिन इससे चोरी की घटना को नकारा नहीं जा सकता। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने ठोस आधार के बिना क्लेम लंबित रखकर उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
आयोग ने बीमा राशि के साथ मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय को भी शामिल करते हुए कुल 1.08 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Author: Khabri Chai
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