E-20 Petrol Controversy: E-20 पेट्रोल पर बढ़ा विवाद, वाहनों को नुकसान के दावों पर सरकार का बड़ा बयान

ई-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर केंद्र सरकार की नीति एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। मंगलवार को सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के संगठन सियाम (SIAM) ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर ई-20 ईंधन में उच्च क्लोराइड मात्रा के कारण वाहनों के महत्वपूर्ण पुर्जों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई है।

किन पार्ट्स पर बताया गया असर

रिपोर्ट्स के अनुसार, सियाम ने कहा कि ईंधन में क्लोराइड की अधिक मात्रा के कारण फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, ईजीआर (EGR) वाल्व और एग्जॉस्ट सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण घटकों के खराब होने और उनके रिप्लेसमेंट के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। संगठन का दावा है कि यह मुद्दा लंबे समय से उद्योग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

सरकार ने आरोपों पर दी सफाई

हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ऐसे किसी पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि देशभर में ईंधन की गुणवत्ता की नियमित और सख्त निगरानी की जा रही है तथा किसी भी प्रकार की मिलावट या गुणवत्ता संबंधी शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है।

87 हजार से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर निगरानी

मंत्रालय के अनुसार, अतिरिक्त जांच अभियान के तहत देशभर के 87,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 8 से 12 बार पानी की जांच की जा रही है। इसके अलावा 2,000 से अधिक ईंधन नमूनों की क्लोराइड और सल्फाइड की जांच भी कराई गई है।

सियाम ने उठाया ई-20 से वाहनों को हो रही क्षति का मुद्दा, सरकार बोली-  क्वालिटी पर हमारी सख्त नजर - vehicles getting damaged by e20 fuel  government responds to siams query

सिर्फ दो मामलों में मिली गड़बड़ी

सरकार का दावा है कि अब तक पूरे देश में क्लोराइड मिश्रण के केवल दो मामले सामने आए हैं। संबंधित पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री तत्काल रोक दी गई और आवश्यक कार्रवाई की गई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन में किसी भी प्रकार की मिलावट पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

दो वर्षों से उठा रहा है उद्योग यह मुद्दा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑटो उद्योग का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से इस विषय को उठा रहा है, लेकिन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की ओर से आवश्यक मानकों में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए। उद्योग का मानना है कि ईंधन गुणवत्ता के मानकों पर और अधिक स्पष्टता तथा सख्ती की जरूरत है।

विवाद के बीच समाधान का इंतजार

ई-20 पेट्रोल को लेकर सरकार और ऑटो उद्योग के अलग-अलग दावों के बीच फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। एक ओर सरकार गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को प्रभावी बता रही है, वहीं दूसरी ओर उद्योग संभावित तकनीकी जोखिमों की ओर इशारा कर रहा है। ऐसे में इस पूरे मामले पर विस्तृत जांच और ठोस समाधान का इंतजार किया जा रहा है।

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Author: Khabri Chai

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