
रायपुर, 26 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती मौसम प्रणाली के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश तेज होने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 27 अक्टूबर को प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है, जबकि 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। इसे देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है।
किसानों को धान, दलहन और तिलहन की फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानी बरतने, कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। वहीं, किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को किसानों की सहायता के लिए अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
28 और 29 अक्टूबर को बारिश का ज्यादा खतरा
मौसम विभाग के 26 अक्टूबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, सोमवार को छत्तीसगढ़ के लिए कोई विशेष वर्षा चेतावनी नहीं है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है।
बारिश की तीव्रता और समय अलग-अलग जिलों में अलग हो सकता है। ऐसे में किसानों और आम नागरिकों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
धान की कटाई फिलहाल रोकने की सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां मौसम को देखते हुए अगले दो से चार दिनों तक कटाई का काम स्थगित रखना उचित होगा।
जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उपज को जल्द से जल्द सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें। खेतों में बारिश का पानी जमा होने से फसल खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए खेतों और मेड़ों की स्थिति के अनुसार अतिरिक्त पानी की निकासी का इंतजाम करना जरूरी है।
फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही जरूरत के अनुसार कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करें। बारिश के दौरान छिड़काव करने से बचें, ताकि दवाओं का अनावश्यक नुकसान न हो।
रबी फसलों की बुवाई में भी बरतें सावधानी
आगामी दिनों में रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश या खेतों में नमी की अधिकता होने पर बुवाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार ही बुवाई का समय तय करना चाहिए।
सब्जी और फल उत्पादकों को भी सतर्क रहने की जरूरत
संभावित तेज हवा और बारिश को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादकों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। करेला और लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा दें, ताकि तेज हवा में पौधों को नुकसान न पहुंचे। केले के पौधों और फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा देने की सलाह दी गई है।
सब्जियों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें। बारिश के दौरान कीटनाशकों और कवकनाशकों का छिड़काव न करें तथा मौसम साफ होने के बाद ही जरूरत के अनुसार उपचार करें।
पशुपालक पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें
बारिश और गरज-चमक की आशंका को देखते हुए पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए सुरक्षित, सूखा और ढका हुआ स्थान तैयार रखने की सलाह दी गई है। पशुओं को खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे बांधने से बचें। साथ ही सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था रखें।
अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश
चक्रवाती मौसम प्रणाली के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और मैदानी अमले को किसानों की मदद के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य मौसम से जुड़ी जानकारी समय पर किसानों तक पहुंचाना और संभावित नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखें और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें। समय रहते फसल, खेत और पशुधन की सुरक्षा के उपाय अपनाकर संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
Author: Khabri Chai
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