रायपुर। महज 12 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहने वाली सुमना कुंडू ने जाते-जाते मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अपनी मृत्यु के बाद भी सुमना दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन देकर अमर हो गई। उसके अंगदान ने न केवल दो परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगाई, बल्कि समाज को भी अंगदान के महत्व का बड़ा संदेश दिया।
जानकारी के अनुसार, रायपुर की रहने वाली सुमना कुंडू गंभीर स्वास्थ्य समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती थी। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने बेहद साहसिक और मानवीय निर्णय लेते हुए उसके अंगदान की सहमति दी।
परिवार के इस फैसले के बाद चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की। सुमना के दान किए गए अंगों से दो गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब परिवार गहरे दुख और भावनात्मक पीड़ा से गुजर रहा था, लेकिन उन्होंने अपने दर्द को मानव सेवा में बदलने का उदाहरण प्रस्तुत किया।

अस्पताल परिसर में उस समय भावुक माहौल बन गया जब सुमना को अंतिम विदाई दी गई। डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों और परिजनों ने नम आंखों से उसे श्रद्धांजलि अर्पित की। अंगदान के इस महान कार्य के सम्मान में सुमना को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। इस दौरान मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और सभी ने परिवार के साहस और संवेदनशीलता की सराहना की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान किसी भी व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी जीवित रखने का सबसे बड़ा माध्यम है। एक अंगदाता कई लोगों की जिंदगी बचा सकता है। देश में अभी भी अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की संख्या काफी अधिक है, ऐसे में सुमना जैसी प्रेरणादायक कहानियां समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम करती हैं।
सुमना के परिजनों ने कहा कि उनकी बेटी अब भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके अंगों के माध्यम से वह किसी और की जिंदगी में मुस्कान बनकर जीवित रहेगी। परिवार का मानना है कि इससे बड़ी श्रद्धांजलि उनकी बेटी के लिए कोई और नहीं हो सकती।
रायपुर में हुए इस भावुक अंगदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसान अपने कर्मों से अमर होता है। 12 साल की सुमना भले ही दुनिया छोड़ गई हो, लेकिन दो लोगों को नया जीवन देकर वह हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
Author: Khabri Chai
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