रायपुर में ट्रैफिक जाम से निपटने की नई तैयारी, इंदौर-मुंबई मॉडल पर चार जोन में बंटेगा शहर

राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव और बेतरतीब पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन अब इंदौर-मुंबई मॉडल लागू करने जा रहा है। शहर में संचालित करीब 30 हजार आटो और ई-रिक्शा को डिजिटल पंजीयन के जरिये अलग-अलग जोनों में बांटने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके लिए पांच जुलाई तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन अब तक सिर्फ 7,500 वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया है।

योजना के तहत प्रत्येक वाहन को क्यूआर कोड और कलर कार्ड जारी किया जाएगा। इसके बाद वाहन केवल तय जोन में ही संचालित हो सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि अभी अधिकांश आटो और ई-रिक्शा मुख्य मार्गों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही चलते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है। जबकि अंदरूनी कालोनियों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं पहुंच पा रही। पंजीयन पूरा होने के बाद डिजिटल मानिटरिंग शुरू होगी और बिना पंजीयन वाले वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

चार हिस्सों में बंटेगा शहर, रंग से होगी पहचान

प्रस्तावित व्यवस्था में शहर को अलग-अलग जोनों में बांटने की तैयारी है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शंकर नगर और टैगोर नगर क्षेत्र को अलग रंग आधारित कार्ड दिए जाएंगे। स्कूल और कालेज वाहनों के लिए अलग कामन जोन रहेगा। प्रत्येक आटो और ई-रिक्शा के क्यूआर कोड में उसका संचालन क्षेत्र, चालक और वाहन की जानकारी दर्ज रहेगी। जांच के दौरान पुलिस मोबाइल से स्कैन कर तुरंत जानकारी हासिल कर सकेगी।

ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए अब रायपुर में लागू होगा इंदौर-मुंबई मॉडल, चार हिस्सों में बंटेगा शहर, रंग से होगी पहचान

अंदरूनी कॉलोनियों तक पहुंचेगी सवारी सुविधा

अभी अधिकांश ई-रिक्शा और आटो चालक भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों पर ही सवारी तलाशते हैं। इससे एक ही सड़क पर बड़ी संख्या में वाहन जमा हो जाते हैं। नई व्यवस्था में जोन आधारित संचालन होने से वाहनों का वितरण अलग-अलग इलाकों में किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इससे उन रिहायशी क्षेत्रों को भी फायदा मिलेगा, जहां अब तक नियमित पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं पहुंच पाता था।

बिना परमिट ई-रिक्शा भी आएंगे निगरानी दायरे में

सरकार ने ई-रिक्शा को परमिट से छूट दी है। लेकिन इसी का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में वाहन बिना किसी नियंत्रण के शहरभर में चल रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ अब स्थानीय स्तर पर इनका डिजिटल रिकार्ड तैयार कर रहे हैं। इससे बिना नंबर, बिना दस्तावेज और नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान आसान होगी। भविष्य में संचालन क्षेत्र तय होने से अनियंत्रित आवाजाही पर भी रोक लगेगी।

बिना पंजीयन सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं

यातायात विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पांच जुलाई के बाद बिना पंजीयन वाले आटो और ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। अभियान के दौरान चालकों को दस्तावेज अपडेट कराने, मोबाइल नंबर दर्ज कराने और डिजिटल आईडी लेने की सुविधा दी जा रही है। विभाग का मानना है कि डिजिटल डेटाबेस बनने से ट्रैफिक प्रबंधन के साथ अपराध नियंत्रण और यात्री सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।

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Author: Khabri Chai

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